Tuesday, June 30, 2020
हवलदार की हत्या का बदला लेने, जब नकली बरात लेकर पहुंचा मेरठ का पुलिस अफसर, कुख्यात 'डाॅन' के खात्मे की दिलचस्प कहानी
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Monday, June 29, 2020
मध्यप्रदेश में इंद्रधनुषी रंग में रंगा केउटी झरना, पंश्चिम बंगाल में 36 फीट लंबी मृत व्हेल मिली, चंडीगढ़ में पूरे एहतियात के साथ खेल शुरू
फोटोरीवा से 40 किमी दूर केउटी झरने की है। हरियाली से घिरे और इंद्रधनुषी रंग में रंगे इस झरने की खूबसूरती देखते ही बन रही है। केउटी झरना भारत का 24वां सबसे ऊंचा झरना है। इसकी ऊंचाई 130 मीटर है। यह महाना नदी पर बना है। यह नदी आगे जाकर टोन्स नदी में मिल जाती है।
व्हेल के शरीर पर चोट के निशान मिले

पश्चिम बंगाल में मिदनापुर के मंदार्मानी गांव में समुद्र तट पर 36 फीट लंबी मृत व्हेल मछली पाई गई। उसके शरीर पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस क्षेत्र में पहली बार व्हेल दिखाई दी है। हालांकि यह साफ नहीं हो सका है कि आखिर इस मछली की मौत कैसे हुई है। इस बात की जांच भी हो रही है कि इस मछली को किसी ने मारा है या फिर यह किसी दुर्घटना का शिकार हुई है।
इटारसी से भोपाल के बीचतीसरी रेल लाइन पर एक किमी लंबी सुरंग बन रही

मध्यप्रदेश में इटारसी से भोपाल के बीच बन रही तीसरी रेल लाइन पर एक किमी लंबी सुरंग बन रही है। विंध्याचल पर्वत के मिडघाट सेक्शन पर यह रेलवे की सबसे बड़ी सुरंग होगी। 180 कर्मचारी रोटेशन में 24 घंटे बूमर मशीन से दिन-रात पहाड़ काटकर सुरंग बना रहे हैं। अभी 220 मीटर तक पहाड़ काटे जा चुके हैं।सुरंग आंध्र प्रदेश की कंपनी एनएटीएम (न्यू ऑस्ट्रेलियन टेक्नोलॉजी मैथर्ड) पद्धति से बना रही है। यानी सुरंग हॉर्स-शू (घोड़े की नाल) की तरह रहेगी।
बारिश होने से लोगों को मिली काफी राहत

सोमवार को शिमला में जमकर बारिश हुई। मॉनसून की बारिश होने के कारण लोगों को काफी राहत मिली है। पिछले कई दिनों से लगातार गर्मी बरस रही है जिससे लोग बारिश आने औरराहत पाने का इंतजार कर रहे थे। बारिश से बचने के लिए लोग रिज के पास पेड़ के नीचे खड़े हो गए।
उपेक्षा के साथ क्वारेंटाइन मजदूरों को दिया जाता राशन

फोटोछत्तीसगढ़ केबसना ब्लॉक केग्राम अखराभाठा टुकड़ा स्थित क्वारेंटाइन सेंटर की है। थैलियों में पैक सूखा राशन यहां क्वारेंटाइन किए गए मजदूरों को इस उपेक्षा के साथ दिया जा रहा है कि कोई खुद्दार उसे स्वीकार ही न करे। लेकिन पेट और जिंदा रहने की विवशता के आगे लानत की यह रोटी भी मजदूरों ने स्वीकार कर ली है।
पूरी एहतियात के साथ खेल शुरू

फोटो चंडीगढ़ के सेक्टर-34 स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की है। कोविड-19 की वजह से खेलों पर भी असर पड़ा।प्लेयर्स की फिटनेस बरकरार रहे, इसके लिए शहर में अलग-अलग जगहों पर प्रैक्टिस शुरू हो गई है। ज्यादातर जगहों पर अभी उन प्लेयर्स को बुलाया जा रहा है जो स्टेट या फिर नेशनल लेवल पर खेल चुके हैं। कोरोना की वजह से प्लेयर्स को काफी एहतियात बरतने पड़ रहे हैं। सभी जगहों पर हर प्लेयर की एंट्री पर रोज उसकी थर्मल स्क्रीनिंग होती है और रिकॉर्ड मेंटेनहोता है। मास्क और दूरी भी जरूरी की हुई है।
दिनभर उमस के बीच सोमवार को अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री

इंदौर मेंसोमवार को शहर में तेज बारिश की संभावना थी। काले और घने बादल भी घिर आए लेकिन कुछ हिस्सों मेंकेवल कुछ पल के लिए तेज बौछार होने के बाद बारिश बंद हो गई। इसके चलते मौसम विभाग के रिकाॅर्ड मेंदर्ज नहीं हुई। वैसे इस सीजन में अब तक पांच इंच बारिश हो चुकी है और जून माह की औसत बारिश का कोटा पूरा हो गया है। दिनभर उमस के बीच सोमवार को अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य रहा, वहीं न्यूनतम तापमान 24.7 डिग्री रहा जो सामान्य से दो डिग्री अधिक दर्ज किया गया।
अफसोस! हम विरासत भी नहीं सहेज पाए

टैगोर हिल रांची की सिर्फ पहचान नहीं है, बल्कि 100 वर्षों से भी अधिक समय से हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई ज्योतिरिंद्रनाथ के जीवन से जुड़ा यह स्थान पर्यटन केंद्र भी है। पर, अफसोस कि हम अपनी विरासत को सहेज नहीं पा रहे। टैगोर हिल का सबसे खास आकर्षण ब्रह्म मंदिर टूट-टूट कर गिर रहा है। मंडप का शीर्ष गुंबद दरकने लगा है, कई जगह से टूट भी गया है। मंदिर के ऊपरी भाग (केनोपी) का डिजाइन टूट कर नीचे गिरा पड़ा है। खंभों में भी दरार आ गई है। ब्रह्म मंदिर के ऊपर पौधे उग आए हैं।
भारत में सफेद सांप आखिरी बार भुवनेश्वर में मिला था

मध्यप्रदेश के खरगोनजिले के चाेली नगर के पास रविवार रात मंडलेश्वर में प्रदेश का पहला कॉमन करैत प्रजाति का सफेद सांप मिला।इसे वन विभाग को सौंपा है। वन विभाग के अनुसार प्रदेशमें इस प्रजाति का पहला सफेद सांप मिला है। भारत में सफेद सांप आखिरी बार भुवनेश्वर में मिला था। वन विभाग इसे पुन: प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ेगा।
350 फीट की ऊंचाई से नए हरसूद का नजारा

मध्य प्रदेश के खंडवा जिला मुख्यालय पर काेराेना के 302 मरीज मिल चुके हैं। आसपास के कुछ गांवाें तक भी पहुंचा, लेकिन 45 किमी दूर बसे नया हरसूद में एक भी मरीज नहीं है। वजह, यहां लाेग ही नहीं, सभी मकानाें में भी डिस्टेंसिंग है। सरकारी रिकाॅर्ड के मुताबिक इंदिरा सागर बांध के कारण 30 जून 2004 को हरसूद डूब में आया। यहां की आबादी को एनएचडीसी ने नए हरसूद में बसाया। यहां 244.63 हेक्टेयर में पुनर्वास किया गया। छनेरा की नवीन आबादी में भी निजी भूमि पर निर्माण में दूरी का ख्याल रखा। यहां वर्तमान में 2000 मकान बने हैं और लगभग सभी के बीच 3 मीटर तक दूरी है।
रेहड़े पर स्कूटर समेत 8-9 लोग, भार से घोड़ा हुआ बेदम

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा जारी है। लगातार बढ़ती कीमतों के खिलाफ विपक्षी दल कांग्रेस सोमवार को सड़क पर उतर गई। उसके नेताओं ने दिल्ली समेत देशभर के कई शहरों में प्रदर्शन किया। चंडीगढ़ व पंजाब में भी प्रदर्शन किया गया। अमृतसर में प्रदर्शन के दौरान एक रेहड़े पर 8-9 लोग स्कूटर सहित सवार हो गए। भार के कारण घोड़ा बेदम हो गया।
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from Dainik Bhaskar /local/delhi-ncr/news/kouti-waterfall-painted-in-rainbow-color-in-madhya-pradesh-36-feet-long-dead-whale-found-in-west-bengal-game-started-with-full-precaution-in-chandigarh-127462600.html
24 घंटे में 18339 मरीज बढ़े, अब तक 5.67 लाख केस; सोलापुर, जलगांव की मृत्युदर सबसे ज्यादा मौतों वाले शहर मुंबई, ठाणे और कोलकाता से ज्यादा
देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 5 लाख 67 हजार 536 हो गई है। सोमवार को 18 हजार से ज्यादा नए मरीज सामने आए और 13 हजार 497 ठीक हो गए। तमिलनाडु में संक्रमित तेजी से बढ़ रहे हैं। बीते 24 घंटे में यहां रिकॉर्ड 3949 मरीज बढ़े, यह संख्या 5वें दिन 3500 से ज्यादा रही। सबसे ज्यादा संक्रमितों वाले राज्यों में यह दूसरे नंबर पर आ गया है। कर्नाटक में भी 1105 नए संक्रमित मिले। ये आंकड़े covid19india.org के मुताबिक हैं।
उधर, 200 से ज्यादा मौतें वाले शहरों में छोटे शहर भी शामिल रहे हैं। यहां मृत्यु दर तेजी से बढ़ रही है। इनमें महाराष्ट्र के सोलापुर और जलगांव शामिल हैं। यहां मृत्यु दर सबसे ज्यादा मौतों वाले शहरों जैसे मुंबई (4371), अहमदाबाद (1423), कोलकाता (366), और ठाणे (714) से ज्यादा है। सोलापुर में मृत्यु दर 9.50% और जलगांव में (7.30%) है।
तमिलनाडु और महाराष्ट्र में लॉकडाउन 31 जुलाई तक बढ़ाया
तमिलनाडु सरकार ने 31 जुलाई तक जनरल लॉकडाउन बढ़ा दिया है। चेन्नई और आसपास के इलाके में 5 जुलाई तक सख्त लॉकडाउन लागू रहेगा। जबकि पूरे राज्य में जुलाई में हर रविवार सख्त लॉकडाउन रहेगा। वहीं, महाराष्ट्र में भी लॉकडाउन 31 जुलाई तक बढ़ाया गया है। इससे पहले पश्चिम बंगाल और झारखंड में लॉकडाउन 31 जुलाई तक और मणिपुर में 15 जुलाई तक बढ़ाया जा चुका है।


5 राज्यों का हाल
मध्यप्रदेश:यहां सोमवार को 184 नए मरीज सामने आए और 7 की जान गई। भोपाल में 24, इंदौर में 49, मुरैना में 24 पॉजिटिव केस बढ़े। राज्य में संक्रमितों की संख्या 13 हजार 370 हो गई, इनमें से 2607 एक्टिव केस हैं। कोरोना से अब तक 564 लोगों की मौत हुई है।

महाराष्ट्र:यहां सोमवार को 5257 संक्रमित मिले और 181 लोगों की मौत हुई। मुंबई में 1226 मामले बढ़े, यहां अब 76 हजार 765 मरीज हो गए। प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 1 लाख 69 हजार 883 हो गई, इनमें से 73 हजार 298 एक्टिव केस हैं। कोरोना से अब तक 7610 ने जान गंवाई।

उत्तरप्रदेश:यहां सोमवार को 681 नए मरीज सामने आए और 12 की जान गई। गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में 57, गाजियाबाद में 70 और लखनऊ में 23 पॉजिटिव केस बढ़े। राज्य में संक्रमितों की संख्या 22 हजार 828 हो गई, इनमें से 6650 एक्टिव केस हैं। कोरोना से अब तक 672 लोगों की मौत हुई है।

राजस्थान:यहां सोमवार को 389 नए मरीज सामने आए और 6 की जान गई। जयपुर में 30, जोधपुर में 54 और धौलपुर में 58 पॉजिटिव केस बढ़े। राज्य में संक्रमितों की संख्या 17 हजार 660 हो गई, इनमें से 3334 एक्टिव केस हैं। कोरोना से अब तक 405 लोगों की मौत हुई है।

बिहार: यहां सोमवार को 394 संक्रमित मिले और एक मौत हुई। पटना में 109, नवादा में 28 और पूर्वी चंपारण में 33 केस बढ़े। प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 9 हजार 618 हो गई, इनमें से 2181 एक्टिव केस हैं। कोरोना से अब तक 63 ने जान गंवाई।

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from Dainik Bhaskar /national/news/coronavirus-outbreak-india-cases-live-news-and-updates-30-june-127462437.html
अनंतनाग जिले के वाघमा इलाके में सुरक्षाबलों का आज फिर आतंकियों से सामना, 24 घंटे में दूसरा एनकाउंटर
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के वाघमा इलाके में सुरक्षाबलों का आतंकियों से एनकाउंटर चल रहा है। आतंकियों के छिपे होने के इनपुट पर सिक्योरिटी फोर्सेज ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इससे पहले सोमवार को आर्मी और पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन में अनंतनाग जिले के खुलचोहर इलाके में 3 आतंकियों को ढेर कर डोडा जिले को आतंकवाद मुक्त घोषित कर दिया था।
#Encounter has started at #Waghama area of #Anantnag. JKP and security forces are on the job. Further details shall follow. @JmuKmrPolice
— Kashmir Zone Police (@KashmirPolice) June 30, 2020
30 दिन में 18वां एनकाउंटर, पिछले 17 में 49 आतंकी मारे गए
| तारीख | जगह | आतंकी मारे गए |
| 1 जून | नौशेरा | 3 |
| 2 जून | त्राल (पुलवामा) | 2 |
| 3 जून | कंगन (पुलवामा) | 3 |
| 5 जून | कालाकोट (राजौरी) | 1 |
| 7 जून | रेबन (शोपियां) | 5 |
| 8 जून | पिंजोरा(शोपियां) | 4 |
| 10 जून | सुगू(शोपियां) | 5 |
| 13 जून | निपोरा(कुलगाम) | 2 |
| 16 जून | तुर्कवंगम(शोपियां) | 3 |
| 18-19 जून | अवंतीपोरा और शोपियां | 8 |
| 21 जून | शोपियां | 3 |
| 23 जून | बंदजू (पुलवामा) | 2 |
| 25 जून | सोपोर (बारामूला) | 2 |
| 25-26 जून | त्राल (पुलवामा) | 3 |
| 29 जून | खुलचोहर (अनंतनाग) | 3 |
| कुल 49 | ||
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from Dainik Bhaskar /national/news/encounter-at-waghama-area-of-anantnag-jammu-and-kashmir-police-and-security-forces-are-on-the-job-127462421.html
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में जानलेवा गैस लीकेज, प्राइवेट कंपनी के 2 कर्मचारियों की मौत
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में मंगलवार सुबह एक फैक्ट्री में गैस लीकेज हुई। घटना में दो कर्मचारियों की मौत हो गई है। घटना सेनर लाइफ साइंसेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की है। यहां बेन्जीमिडेजोल गैस लीक हुई। हादसे के बारे में ज्यादा जानकारी का इंतजार है।
करीब दो महीने में यहां लीकेज की यह तीसरी घटना है। 8 मई को विशाखापट्टनम के करीब एक फैक्ट्री में लीक से 11 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद इसी महीने 27 तारीख को कुर्नूल में भी एक हादसा हुआ था। इसमें कंपनी के मैनेजर की मौत हो गई थी।
27 जून को कुर्नूल में हुआ था हादसा
कुर्नूल जिले के नंद्याल शहर में एसपीवाई एग्रो केमिकल फैक्ट्री में 27 जून को अमोनिया गैस लीक होने से एक मैनेजर की मौत हो गई थी। तीन मजदूरों की तबीयत खराब हुई थी। हादसे के समय फैक्ट्री में कुल 5 लोग थे। यह फैक्ट्री दिवंगत पूर्व सांसद एसपीवाई रेड्डी की थी जो नंदी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी कंपनी है।
8 मई का हादसा बेहद भयानक था
8 मई को विशाखापट्टनम के वेंकटपुरम गांव की एक केमिकल फैक्ट्री से स्टाइरीन गैस लीक होने से 11 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें दो बच्चे भी शामिल थे। गैस एलजी पॉलिमर्स के प्लांट से लीक हुई थी। स्टाइरीन गैस प्लास्टिक, फाइबर ग्लास, रबर और पाइप बनाने में इस्तेमाल होती है। गैस का असर प्लांट के आसपास तीन से चार किमी इलाके में महसूस किया गया था। पुलिस को करीब 50 लोग तो सड़कों पर बेहोश मिले थे।
गैस लीक पर आप ये खबरें भी पढ़ सकते हैं...
1. कुर्नूल में पूर्व सांसद की फैक्ट्री से अमोनिया गैस लीक हुई; मैनेजर की मौत, 3 की तबीयत बिगड़ी
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from Dainik Bhaskar /national/news/another-leakage-of-gas-in-visakhapatnam-andhra-pradesh-two-workers-died-127462429.html
कांग्रेस सरकार गिरने के 100 दिन होने पर काला दिवस मनाएगी; भाजपा खेमे में सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी
मध्य प्रदेश में 30 जून को कांग्रेस सरकार गिरने के 100 दिन पूरे हो जाएंगे। भाजपा सरकार द्वारा मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी की जा रही है।वहीं, कांग्रेस इस दिन को काला दिन के रूप में मनाने की तैयारी कर रही है। पूर्व मंत्री औरकांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीसी शर्मा ने कहा है कि भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या करकेसत्ता हथियाई है। कांग्रेस सरकार गिरने के 100 दिन पूरे होने परमंगलवार कोपार्टीकार्यकर्ता पूरे प्रदेश में काला दिवस मनाएंगे।
इसी साल 20 मार्च को कमलनाथ ने विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 23 मार्च को चौथी बार शिवराज सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। बाद में पूरे देश में कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन लगा दिया गया।
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 15 माह में जो कार्य किए हैं वे भाजपा की शिवराज सरकार के 15 वर्ष पर भारी पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 30 जून को शिवराज सरकार के 100 दिन पूरे हो रहे हैं। इन 100 दिनों में सबसे महंगा पेट्रोल औरडीजल प्रदेश में बिक रहा है। देश में सबसे ज्यादा महंगे बिजली बिल प्रदेश की जनता को भरना पड़ रहेहैं। महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। प्रदेश का विकास ठप पड़ गया है। इसके विरोध स्वरूप पूरे प्रदेशमें 30 जून को कांग्रेस पार्टी काला दिवस मनाते हुए मुख्यमंत्री का पुतला दहन करेगी।
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अनलॉक 1.0: कुल 311 कोरोना संक्रमित मिले, ठीक होने वालों की अच्छी संख्या
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पढ़िए गोरखपुर के उस 'खूंखार डॉन' की कहानी, जिसके नाम पर कांपता था यूपी-बिहार
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इस सीजन में आज शादी करने का है आखिरी दिन, जानिए कब आएगा अगला शुभ मुहूर्त
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दुनियाभर में 148 वैक्सीन पर काम चल रहा, इनमें से 17 क्लीनिकल ट्रायल के फेज में; भारत में भी 14 वैक्सीन पर काम
दुनिया के 216 देश इस समय कोरोनावायरस से जूझ रहे हैं। दुनियाभर में इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1 करोड़ के पार पहुंच गई है। मौतों का आंकड़ा भी 5 लाख के ऊपर आ गया है।
अब बस एक ही सवाल सबके जहन में आता है कि आखिर कब तक हमें कोरोना से लड़ना पड़ेगा? कब तक इसकी कोई असरदार दवा या वैक्सीन आ पाएगी? तो इसका जवाब अभी किसी के पास भी नहीं है।
हालांकि, डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, 28 जून तक दुुनियाभर में कोरोना की 148 वैक्सीन पर काम चल रहा है। इनमें से 131 वैक्सीन प्री-क्लीनिकल प्रोसेस में है, जबकि बाकी 17 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल के फेज में आ गई हैं।
आमतौर पर किसी भी बीमारी की वैक्सीन बनने में 15 साल से भी ज्यादा का वक्त लगता है। लेकिन, दुनियाभर में कोरोना की वैक्सीन को लेकर जिस तेजी से काम चल रहा है, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस साल के आखिर तक या जून 2021 तक हमारे पास एक अच्छी वैक्सीन होगी।
कुछ दिन पहले ही डब्ल्यूएचओ की चीफ टेड्रोस अधेनॉम गेब्रेसियस ने भी एक साल के अंदर कोरोना की वैक्सीन आ जाने की उम्मीद जताई है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविड वैक्सीन तीसरे फेज में
ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और वहां की एक कंपनी एस्ट्राजैनेका (AstraZeneca) एक वैक्सीन पर काम कर रही है। ये वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के तीसरे फेज में पहुंच चुकी है।
वैक्सीन के प्रोडक्शन के लिए एस्ट्राजैनेका ने कई कंपनियों से हाथ मिलाया है। इसमें भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी है। इन कंपनियों की मदद से कंपनी जून 2021 तक 200 करोड़ वैक्सीन बनाना चाहती है।

भारत में भी 14 वैक्सीन पर काम चल रहा
इस महीने की शुरुआत में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने बताया था कि भारत में कोरोना की 14 वैक्सीन पर काम चल रहा है। इनमें से 4 वैक्सीन का काम अगले 3 से 5 महीनों में क्लीनिकल ट्रायल के फेज में पहुंचने की उम्मीद है।
इन सबके अलावा दुनियाभर में जिन 148 वैक्सीन पर काम चल रहा है, उसमें 5 या तो भारतीय कंपनियों की है या फिर भारतीय कंपनियां हिस्सेदार हैं। गुजरात की जायडस कैडिला कंपनी भी है। इसी कंपनी ने 2010 में देश में स्वाइन फ्लू की सबसे पहली वैक्सीन तैयार की थी।
इसके अलावा भारत बायोटेक दो, इंडियन इम्युनोलॉजिकल्स लिमिटेड और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया 1-1 वैक्सीन पर दूसरे देशों की संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
वैक्सीन के लिए कितना खर्चा?
कोरोना महामारी से निपटने के लिए दुनियाभर की सरकारें करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैं। भारत में भी पीएम केयर्स फंड से 100 करोड़ रुपए वैक्सीन पर खर्च हो रहे हैं।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कोरोना से संक्रमित होने का खतरा सभी को है, इसलिए इसके इलाज और रोकथाम के उपाय भी सभी के लिए होने चाहिए।
इसी हफ्ते यूएन ने भी कहा है कि कोरोना के असरदार इलाज और वैक्सीन के लिए अगले 12 महीनों में 31 अरब डॉलर (करीब 2.35 लाख करोड़ रुपए) की जरूरत होगी।
अप्रैल में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने भी अनुमान लगाया था कि अगर हम कोरोना की कोई कारगर वैक्सीन बना भी लेते हैं, तो हमें इसकी मैनुफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए 25 अरब डॉलर (करीब 1.90 लाख करोड़ रुपए) की जरूरत होगी।
बिल गेट्स ने भी एक ब्लॉग के जरिए कहा था कि अगर हम कोरोना की कारगर वैक्सीन बनाने में कामयाब होते हैं, तो इससे हम लाखों करोड़ रुपए बचाने में भी कामयाब होंगे।
किस देश को सबसे पहले मिलेगी कोरोना की वैक्सीन?
अगर कोरोना की कोई वैक्सीन बन जाती है, तो ये सबसे पहले किसे मिलेगी? तो इसका जवाब तो यही है कि जो देश पहले इस वैक्सीन को बनाएगा, वहीं के लोगों को सबसे पहले वैक्सीन मिलेगी।
पिछले हफ्ते अमेरिका के टॉप इन्फेक्शियस डिसीज एक्सपर्ट डॉ. एंथनी फाउची ने कहा है कि उन्हें इस साल के आखिर तक या 2021 की शुरुआत में कोरोना की एक वैक्सीन मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और चीन भी वैक्सीन पर करोड़ों खर्च कर रहे हैं। ब्रिटेन की एस्ट्राजैनेका ने वैक्सीन के प्रोडक्शन के लिए भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से पार्टनरशिप की है। अगर एस्ट्राजैनेका वैक्सीन बना लेती है, तो सीरम इंस्टीट्यूट भारत में भी 1 अरब डोज तैयार कर लेगी।
तब भी सबसे बड़ा सवाल, क्या कोरोना की वैक्सीन आ पाएगी?
कोरोनावायरस से बचने के लिए वैक्सीन का काम भले ही तेजी से चल रहा हो और दुनियाभर में वैक्सीन के आने पर उम्मीदें जताई जा रही हों। लेकिन, फिर भी एक सवाल यही है कि क्या कोरोना की वैक्सीन बन पाएगी?
ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोनावायरस भी एक तरह का फ्लू है। फ्लू की बीमारी करीब सैकड़ों साल पुरानी है, लेकिन आज तक फ्लू की कोई वैक्सीन नहीं बन सकी है। यही कारण है कि हर साल सर्दी-जुकाम की बीमारियां फैलती हैं।
इसके अलावा इसका दूसरा कारण ये भी है कि कुछ खतरनाक बीमारियों की वैक्सीन अभी तक नहीं बन सकी।
1981 में एचआईवी वायरस फैला। इस वायरस की वजह से इंसानों में एड्स की बीमारी फैलती है। 4 दशक बीत जाने के बाद भी इस बीमारी की कोई असरदार दवा या वैक्सीन नहीं बन सकी। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, इससे अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
इसके बाद 2002-03 में चीन से ही सार्स फैला। दुनियाभर में इसके करीब साढ़े 8 हजार मामले सामने आए थे, जबकि 750 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। हालांकि, जल्द ही इस बीमारी पर काबू पा लिया गया था, लेकिन कोई वैक्सीन नहीं बनाई जा सकी।
2015 में मर्स वायरस फैला था। इससे अब तक ढाई हजार लोग संक्रमित हो चुके हैं और 850 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। अभी भी मर्स वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और कुछ देशों में इसके मामले अभी भी आते रहते हैं। लेकिन, इसकी भी कोई वैक्सीन अभी तक तैयार नहीं हो सकी है।
कुछ वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि सार्स और मर्स जैसे वायरस फैलने के बाद अगर इन बीमारियों से निपटने के लिए वैक्सीन पर काम जारी रहता तो कोरोना की वैक्सीन बनाने में ज्यादा कठिनाई नहीं आती। क्योंकि, सार्स और मर्स भी कोरोनावायरस ही है।
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1 जुलाई से राज्य के लोग कर सकेंगे बद्रीनाथ और केदारनाथ के दर्शन, कोरोना की वजह से पुजारी और समितियां अभी यात्रा शुरू करने के पक्ष में नहीं
नेशनल अनलॉक की प्रक्रिया में 1 जुलाई से उत्तराखंड के चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री मंदिरराज्य के आम दर्शनार्थियों के लिए खुल जाएंगे। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानमप्रबंधन बोर्ड ने 29 जून को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से मंदिर समितियां और पुजारी अभी दर्शन शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं।
इस संबंध में हमने बद्रीनाथ के रावल ईश्वरप्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवनचंद्र उनियाल, केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित विनोद प्रसाद शुक्ला, गंगोत्री मंदिर समिति अध्यक्ष सुरेश सेमवाल, यमनोत्री मंदिर समिति सचिव कृतेश्वर उनियाल से बात की है।
देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि चारधाम दर्शन के लिए आने वाले लोगों को बोर्ड की वेबसाइट https://ift.tt/31RZQAk पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद ही मंदिरों में दर्शन करने की अनुमति मिलेगी। भक्तों को अपने साथ ई-पास और फोटो आईडी अनिवार्य रूप से रखना होगा। इनके आधार पर जिला पुलिस धाम क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देगी।
अन्य राज्य के लोगों को, क्वारैंटाइन किए गए, कंटेंमेंट और बफर झोन से आने वाले लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यहां आने वाले भक्तों को मंदिर क्षेत्र में रुकने के लिए एक दिन की अनुमति मिलेगी। विशेष परिस्थितियों में ये समय बढ़ भी सकता है। इन मंदिरों के आसपास स्थित धर्मशालाएं, होटल्स, रेस्टोरेंट, ढाबे, गेस्ट हाउस से संबंधित लोगों के लिए मरम्मत आदि कार्य करने की अनुमति रहेगी।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी है नियमों का पालन करना
चारधाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को मास्क पहनना होगा, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। 65 साल से अधिक उम्र वाले लोग और 10 साल से छोटे बच्चों को दर्शन करने की अनुमति नहीं मिलेगी। जिन लोगों में महामारी से संबंधित कोई भी लक्षण होंगे, उन्हें प्रवेश नहीं दिया जाएगा। भगवान को प्रसाद, हार-फूल चढ़ाना वर्जित रहेगा। दूर से ही भगवान के दर्शन कराना होंगे।
मंदिर के पुजारी और समितियां दर्शन यात्रा शुरू करने के पक्ष में नहीं
उत्तराखंड सरकार 1 जुलाई से इन मंदिरों में दर्शन व्यवस्था शुरू कर रही है, लेकिन इन मंदिरों के पुजारी और समितियां कोरोना वायरस की वजह से अभी दर्शन शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं।
बद्रीनाथ के रावल ईश्वरप्रसाद नंबूदरी का कहना है कि अभी देशभर में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। ऐसी स्थिति में यात्रा करना स्वास्थ्य की दृष्टि से सही नहीं है। बाहर के लोग यहां आएंगे तो इस क्षेत्र में महामारी फैल सकती है। अभी भगवान भी यही चाहते हैं कि सभी भक्त अपने-अपने घर पर ही रहें और घर में ही पूजा-पाठ करें। इसी में सभी का हित है। जब तक महामारी का प्रकोप कम न हो जाए, तब तक सभी को सावधानी रखनी चाहिए। बद्रीनाथ क्षेत्र के लोग भी यही चाहते हैं कि अभी दर्शन शुरू नहीं होना चाहिए।
केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित विनोद प्रसाद शुक्ला इस समय यात्रा शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि केदारनाथ क्षेत्र में सभी होटल्स, धर्मशालाएं अभी बंद हैं। ऐसे में यहां आने वाले लोगों को रहने-खाने की दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। बाहरी लोग यहां आएंगे तो यहां भी कोरोना वायरस फैल सकता है। इसीलिए हम इस समय यात्रा शुरू करने का विरोध कर रहे हैं।
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मौत का खतरा डॉक्टरों को कम, सिक्योरिटी गार्ड को ज्यादा, ब्रिटेन में 4700 मरीजों पर हुई रिसर्च का नतीजा
कोरोना से मौत का खतरा डॉक्टरों से दोगुना फैक्ट्री के मजदूरों और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे लोगों को है। यह आंकड़ा ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने अलग-अलग क्षेत्र में काम कर रहे 4700 कोविड-19 के मरीजों के डेटाका एनालिसिस करने के बाद जारी किया है। रिपोर्ट में 9 मार्च से 25 मई के बीच 20 से 64 साल के कोरोना पीड़ितों को शामिल किया था।
रिसर्च में सामने आया कि एक लाख लोगों पर 74 पुरुष सिक्योरिटी गार्ड और 73 फैक्ट्री वर्कर की कोरोना से मौत हुई।
1 लाख लोगों पर 30 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हुई
वहीं, स्वास्थ्य कर्मियों में यही आंकड़ा अलग रहा है। इनमें 1 लाख लोगों पर 30 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक, एम्बुलेंस स्टाफ में संक्रमण का खतरा 82.4 फीसदी रहा, जो सबसे ज्यादा था। हालांकि, हमारा मकसद यह बताना नहीं है कि डॉक्टरी पेशे के मुकाबले ये नौकरियांखतरनाक हैं बल्कि, लोगों को सावधान रखना है।
गार्ड और मजदूर सबसे ज्यादा सम्पर्क में आए
विशेषज्ञों के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान भी फैक्ट्री वर्करों ने लगातार काम किया। जब कोरोना के मामले तेजी से फैल रहे थे तो वो लोगों के सम्पर्क में भी आए। वहीं, सुपर मार्केट में तैनात सिक्योरिटी गार्ड्स लाइन में लगे कस्टमर को सोशल डिस्टेंसिंग से बचाते हुए सैकड़ों लोगों सम्पर्क में आए।
सबसे अधिक खतरा अश्वेत-एशियाई लोगों को
विशेषज्ञों के मुताबिक, पुरुषों के लिए 17 अलग-अलग क्षेत्रों में मौत का खतरा अधिक रहा। इनमें टैक्सी ड्राइवर (65.3), शेफ (56.8), बस एंड कोच ड्राइवर्स (44.2), सेल्स-रिटेलअसिस्टेंट (34.2) शामिल हैं। जबकि ब्रिटेन में कोविड-19 मौत की दर 19.1 रही है। कोविड-19 से मौत के आंकड़े 1 लाख आबादी के आधार पर है।इनमें भी सबसे अधिक खतरा अश्वेत और एशियाई मूल के लोगों को है।
महिलाओंमें मौत का सर्वाधिक खतरा ग्रूमिंग इंडस्ट्री से
विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाओं में मौत का सबसे अधिक खतरा ग्रूमिंग इंडस्ट्री में काम करने वालीमहिलाओं को है। इनमें एक लाख में 31 महिलाओं की मौत हुई। हेल्थ एनालिस्ट बेन हम्बरस्टोन के मुताबिक, सिर्फ किसी क्षेत्र में मौत का खतरा अंतिम नतीजा नहीं है, इसके लिए यह भी निर्भर करता है कि आप किसउम्र औरकिस मूल के हैं।
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अगर यह लगता है कि चीन बल प्रयोग का खेल खेल रहा है और उसकी अपेक्षाएं अवास्तविक हैं, तो उसे वहां जमे रहने दो और तुम भी वहीं जमे रहो
चीनी युद्ध का माहौल क्यों बना रहे हैं? लद्दाख में फौज इकट्ठी क्यों कर रहे हैं? वे भारत से क्या चाहते हैं? भारत इस सबका कैसे जवाब दे? इनके जवाब के लिए करीब 20 साल पीछे चलें और देखें कि भारत, पाकिस्तान से कैसे निपट रहा था। और याद करें कि भारत ने किस रणनीतिक दांव की खोज की थी, जिसे ‘बलप्रयोग की कूटनीति’ कहा गया था।
शायद जसवंत सिंह या दिवंगत ब्रजेश मिश्र में से किसी एक ने दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद भारत की ओर से शुरू किए गए ‘ऑपरेशन पराक्रम’ के बारे में बताने के लिए इसका प्रयोग किया था। इसके तहत भारत ने सीमाओं पर सैनिकों, भारी फौजी साजो-सामान का ऐसा जमावड़ा किया था, मानो अब जंग होने ही वाली हो।
ऐसा ही कुछ आज लद्दाख में एलएसी के उस पार पूरब में होता लग रहा है। चीनी लद्दाख में जमीन के टुकड़े के लिए तो खतरा नहीं मोल ले रहे होंगे। न ही यह ‘सीपीईसी’ को कबूल करवाने या अक्साई चीन के औपचारिक विलय के लिए ही हो सकता है। यह तो कुछ बड़ी ही महत्वाकांक्षा होगी, जो पूरी होने से रही। तब चीन आखिर क्या हासिल करना चाहता है?
भारत बेशक पाकिस्तान नहीं है। कभी नहीं हो सकता। लेकिन हम यहां केवल जंग का खेल खेल रहे हैं। आप कह सकते हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति बनाने से बाज आए, यह गारंटी हासिल करने के लिए भारत ने ‘ग्रीनलैंड’, ‘यलो लैंड’ या किसी और ‘लैंड’ पर दावा किया होगा।
वह गारंटी भारत को संसद पर हमले के एक महीने के अंदर मिल गई थी, जब परवेज़ मुशर्रफ ने अपने भाषण में इसका वादा किया था। बल्कि उन्होंने तो पाकिस्तान में मौजूद दाऊद इब्राहीम समेत उन 24 आतंकवादियों की सूची को भी कबूल किया था और वादा किया था कि वे उनकी खोज करवा के भारत को सौंप देंगे ‘क्योंकि ऐसा नहीं है कि हमने उन्हें अपने यहां पनाह दे रखी है’।
लेकिन भारत और ठोस चीज़ की मांग कर रहा था, इसलिए जंग जैसा जमावड़ा कायम रहा। हालात तब बेकाबू होते दिखे जब आतंकवादियों ने जम्मू की कालुचक छावनी में भारतीय सैनिकों के परिवारों पर हमला किया। लेकिन संयम बना रहा, कुछ तो इसलिए कि पाकिस्तान पर विदेशी दबाव बना और ज्यादा इसलिए कि भारत ने कभी युद्ध छेड़ने का इरादा नहीं किया था।
उस दौरान मैंने जसवंत सिंह, ब्रजेश मिश्र और अटल बिहारी वाजपेयी से पूछा था कि क्या इस तरह की चाल से टकराव बेकाबू होने का खतरा नहीं है? मिश्र का जवाब था कि ‘बल प्रयोग की कूटनीति’ कारगर हो इसके लिए जरूरी है कि दबाव इतना असली दिखे कि कभी-कभी खुद हमें जंग का खतरा दिखने लगे। यह मजबूत देश की दबाव की चाल थी।
आज जब आप एलएसी के पार पूरब की ओर देखते हैं, तब क्या ऐसा ही कुछ आभास नहीं होता? भारत की उस चाल के बाद कई सालों तक अमन-चैन रहा। लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि दोनों पक्षों ने क्या सही किया और क्या नहीं किया। भारत ने वास्तविक फौजी जमावड़े की शुरुआत तो शानदार की मगर वह यह गुर भूल गया कि जीत का ऐलान कब करना है।
यह ऐलान उसी दिन कर सकते थे जब मुशर्रफ ने वह भाषण दिया था। पाकिस्तान ने इस खेल में बहुत जल्दी ही हार कबूल करके गलती की। अगर भारत ने तब अपनी जीत की घोषणा करके जमावड़ा हटा लिया होता तो उसे लगभग उतना ही फायदा होता जितना अंततः हुआ, लेकिन बेहिसाब खर्च, तनाव और अनिश्चितता से बच सकते थे।
इसके अलावा ‘बल प्रयोग की कूटनीति’ की स्पष्ट कामयाबी दिखती। लेकिन हमारी अपेक्षाएं बहुत ऊंची थीं। दूसरी ओर, पाकिस्तान भारत को थकाने के लिए मोर्चे पर डटा रहा। कुछ समय बाद जमावड़ा बेमानी हो गया। अब भारत जब इसी समीकरण का दूसरा पक्ष है, वह ये सबक लेकर आगे बढ़ सकता है-
1. कभी भी पीछे मत हटो, डटे रहो। विवेक का साथ मत छोड़ो, पर्दे के पीछे खुले दिमाग से बातचीत जारी रखो। कभी भी मुशर्रफ की तरह जल्दबाज़ी में पीछे मत हटो।
2. दूसरे पक्ष के इरादों को समझने में पूरा वक़्त लो। यह फैसला करो कि क्या उपयुक्त जवाबी कार्रवाई हो सकती है। लेकिन दबाव में कुछ भी कबूल मत करो।
3. लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहो। अगर यह लगता है कि चीन बल प्रयोग का खेल खेल रहा है और उसकी अपेक्षाएं अवास्तविक हैं, तो उसे वहां जमे रहने दो और तुम भी एलएसी के पास जमे रहो। उसे थका डालो।
4. और अंत में, याद रखो कि कोई दो घटनाएं एक समान नहीं होतीं। इसलिए धमकी अगर धक्का-मुक्की में बदलती हो तो उसके लिए भी तैयार रहो। बृजेश मिश्र के ये शब्द याद रखों- ‘बल प्रयोग की कूटनीति’ कारगर हो इसके लिए जरूरी है कि दबाव इतना असली दिखे कि कभी-कभी खुद हमें जंग का खतरा दिखने लगे। इसलिए, इस कूटनीति का जवाब देने का तरीका यही हो सकता है कि दूसरे पक्ष की ओर से युद्ध की आशंका को इतना वास्तविक मानो कि उस पर यकीन करने लगो।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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असली कहानी यह है कि अमेरिका और चीन तलाक की तरफ बढ़ रहे हैं, जिसके कागजातों पर लिखा होगा, ‘कभी न खत्म होने वाले मतभेद’
ट्रम्प के फन हाउस, माफ कीजिएगा, व्हाइट हाउस के बारे में जॉन बॉल्टन की किताब में मेरी पसंदीदा कहानी वह है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रम्प चीन के नेता से ज्यादा अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने की अपील कर रहे थे, ताकि किसान ट्रम्प को वोट दें और वे फिर चुने जाएं। डोनाल्ड, गिड़गिड़ाना बंद कीजिए। शी जिनपिंग और व्लादिमिर पुतिन दोनों ने आपको वोट देने का फैसला कर लिया है। वे जानते हैं कि जबतक आप राष्ट्रपति हैं, अमेरिका में खलबली रहेगी।
शी के लिए इसका मतलब है कि अमेरिका कमजोर आर्थिक प्रतिद्वंद्वी रहेगा और पुतिन के लिए इसका मतलब है कि उनके लोगों के लिए अमेरिका कम आकर्षक लोकतांत्रिक मॉडल रहेगा। वे ये भी जानते हैं कि जब तक आप राष्ट्रपति हैं, अमेरिका कभी भी उनके खिलाफ सहयोगियों का समूह नहीं बना पाएगा, जिससे चीन अपने व्यापार और मानवाधिकारों मसलों के कारण और रूस यूक्रेन और सीरिया मामले के कारण डरता है।
ये मैं नहीं कहता। जेनेवा में चीनी व्यापार मध्यस्थ रहे झू शिआयोमिंग ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘अगर बाइडेन जीतते हैं तो यह चीन के लिए खतरनाक होगा क्योंकि वे सहयोगियों के साथ चीन के खिलाफ काम करेंगे, जबकि ट्रम्प अमेरिका के सहयोगियों को बर्बाद कर रहे हैं।’ अगर चीन शायद ऐसा सोचता है कि उसे डरने की जरूरत नहीं है और उसे ट्रम्प की जीत से ज्यादा फायदा नहीं है, तो अमेरिका-चीन की असली कहानी बीजिंग के लिए चिंताजनक हो सकती है।
असली कहानी यह है कि 1989 के तियानानमेन स्क्वेयर के बाद से चीन की अमेरिका में अब तक की सबसे कमजोर स्थिति है। असली कहानी यह है कि इस बार अमेरिका से कुछ और अनाज और बोईंग खरीदने से बीजिंग की समस्याएं हल नहीं होंगी।
चीनियों को खुद से जो सवाल पूछना चाहिए, वह यह नहीं है कि अमेरिका का अगला राष्ट्रपति कौन होगा, बल्कि उन्हें पूछना चाहिए, ‘चीन में किसने अमेरिका को खो दिया।’ क्योंकि असली कहानी यह है कि अमेरिका और चीन तलाक की तरफ बढ़ रहे हैं। तलाक के कागजातों पर बस इतना लिखा होगा, ‘कभी न खत्म होने वाले मतभेद’।
वे 40 साल एक दंपति, दो तंत्र की तरह रहने के बाद तलाक ले रहे हैं क्योंकि चीन का प्रदर्शन बुरी तरह से महत्वाकांक्षी रहा है और अमेरिका का बुरी तरह से खराब।
अमेरिकी अब भी व्यापार करेंगे, कूटनीतिक स्तर पर जुड़ेंगे, अब भी पर्यटक आएंगे-जाएंगे, अमेरिकी बिजनेस अब भी चीन के बड़े मार्केंट में काम करना चाहेंगे। लेकिन अब से यह सब सीमा में होगा, अवसरों पर ज्यादा प्रतिबंध होंगे और रिश्ते को ज्यादा शक की निगाह से देखा जाएगा और यह डर रहेगा कि कभी भी फूट पड़ सकती है।
इसकी तुलना आखिरी 40 वर्षों से करें तो यह तलाक जैसा ही लगेगा। ग्रेटर चाइना के लिए एपीसीओ वर्ल्डवाइड के अध्यक्ष जिम मैक्ग्रेगर कहते हैं, ‘दोनों पक्ष कह रहे हैं, अब बहुत हो गया।’ खुद ट्रम्प ने हाल ही में ट्वीट किया जिसमें ‘चीन से पूरी तरह अलग होने’ के विकल्प की बात लिखी थी।
लेकिन दोनों पक्षों का बराबर दोष नहीं है। शी के युग में अमेरिका-चीन रिश्तों में गिरावट की शुरुआत 2012 में हुई। जबसे शी ने सत्ता संभाली चीन में काम कर रहे अमेरिकी पत्रकारों की पहुंच कम कर दी गई। चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी ताकत दिखाने में आक्रामक होने लगा। वह 2025 तक मुख्य उद्योगों पर हावी होने के लिए अपने हाई-टेक स्टार्टअप्स को नियम विरुद्ध फायदे पहुंचाने लगा।
वह हॉन्गकॉन्ग की आजादी को कम करने के लिए नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर रहा है। वह ताइवान को और धमकाने लगा है। उसने भारत के प्रति आक्रामक रवैया अपनाया हुआ है। उसने झिंनजिआंग में उइगर मुस्लिमों की नजरबंदी बढ़ा दी है। उसने उन देशों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है जो वुहान से कोरोना के फैलने की जांच की मांग कर रहे हैं।
लेकिन अगर चीन अधिक महत्वाकांक्षी हुआ है, तो अमेरिका का प्रदर्शन लगातार खराब रहा है। उसने अपनी क्षमता के मुताबिक सुविधाओं, शिक्षा, वैज्ञानिक शोध, अप्रवासन पर निवेश करना कम कर दिया है। उत्पादक निवेशों को बढ़ाने और ज्यादा जोखिम को रोकने के लिए सही नियम बनाना कम कर दिया है।
अमेरिका जिस मामले में चीन से आगे था, उसका फायदा उठाना भी बंद कर दिया है। वह यह कि अमेरिका के पास ऐसे सहयोगी हैं जो उसकी तरह सोचते हैं और चीन के पास सिर्फ ग्राहक हैं, जो उसकी नाराजगी से डरते हैं।
अगर अमेरिका के सहयोगी उसके साथ आ जाएं तो मिलकर व्यापार के नए नियमों को स्वीकारने और कोविड-19 तथा अन्य कई मुद्दों के मामले में चीन को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन ट्रम्प ने ऐसा करने से इनकार कर हर चीज को द्विपक्षीय डील या शी के साथ लड़ाई बना दिया।
आज के रिश्तों का सार बताते हुए मैकग्रेगर कहते हैं, ‘मुझे नहीं लगता कि अब चीनी, अमेरिका को गंभीरता से लेते हैं। वे हमें खुद को नुकसान पहुंचाते देख खुश हैं। हमें अभी कुछ करना होगा।’ और अपने सहयोगियों को साथ लाना होगा। चीन सिर्फ एक चीज का सम्मान करता है: फायदा। जो आज हमारे पास बहुत कम है और चीन के पास बहुत ज्यादा।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
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बोर्ड पर लिखा- अपराध, मगर बिहार में अल्ट्रासाउंड से बेटी देखकर 8000 रुपए में ही ले रहे हैं हत्या की ‘सुपारी’
लॉकडाउन से ठीक पहले पूरे बिहार में 25 दिनों तक 11 जिलों के 95 अल्ट्रासाउंड लैब की दैनिक भास्कर ने पड़ताल की। सामने आए कोरोना से भी खतरनाक वायरस, जो अजन्मे बच्चियों को आपकी सोच से भी ज्यादा क्रूरता से मारते हैं...इसके लिए सौदा करते हैं। हमारे स्टिंग में 30 सेंटरों ने भ्रूण का लिंग बताने की गारंटी दी। कोरोना महामारी के दौरान हमने कोरोना से जंग को ही प्राथमिकता दी।
हमने इन सेंटरों पर लगातार नजर रखी। लॉकडाउन के दौरान ये बंद रहे। अब लॉकडाउन हटा तो हमारी टीम दोबारा इन सभी सेंटरों पर पहुंची। यहां ये धंधा फिर उसी तरह चलने लगा था। टीम को सात लैब ऐसे भी मिले, जो किसी पहचान वाले को लाए बगैर रेट बताने को तैयार नहीं हुए।
भास्कर टीम ज्यादा खुलकर डील करने वाले 10 जिलों के 21 लैब के स्टिंग ऑपरेशन में सामने ला रही कि यहां मां के पेट में पल रहे भ्रूण का लिंग बताने को डॉक्टर, नर्स या स्टाफ उसी तरह तैयार हैं, जैसे मांस की दुकानों पर कसाई तैयार बैठे रहते हैं। कई क्लिनिक तो बेटी होने पर गर्भ गिराने का पैकेज तक बनाए बैठे हैं।
औरंगाबाद में भास्कर टीम ने कम दिनों की गर्भवती महिला को लैब तक ले जाकर स्टिंग किया। हमने जिस गर्भवती महिला की मदद ली, उसमें इस बात का ध्यान रखा कि गर्भ कम समय का हो, जिससे लिंग की पुष्टि न हो सके। स्टिंग ऑपरेशन की टीम जितनी जगह गई, उनमें लिंग जांच से सीधे इनकार करने वाले भी मिले।
हत्यारों को 5 साल की सजा का भी डर नहीं
ये अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर भी पोस्टर लिख है- ‘यहां लिंग परीक्षण नहीं किया जाता है, यह गैरकानूनी और अपराध है।’ हकीकत आपके सामने है। वैसे भ्रूण की लिंग जांच पर डॉक्टर और/या क्लिनिक संचालक के पहले अपराध पर तीन साल, दूसरे पर 5 साल तक जेल का प्रावधान है, लेकिन इसका डर किसी को नहीं।
ये कोरोना से भी बड़े काल... कुछ जगहों पर सिर्फ कर्मचारी बदले, काम नहीं
औरंगाबाद में क्लिनिक से डॉक्टर का रेफर
डॉक्टर- चेक कर लिए हैं, गर्भवती हैं।
रिपोर्टर- हां सर, लेकिन यही तो दिक्कत है।
डॉक्टर- जो बात है, साफ-साफ बोलिए।
रिपोर्टर- 3 बच्ची पहले से है। जांच कराना है।
डॉक्टर- पहले बोलना चाहिए था। हो जाएगा।
रिपोर्टर- पैसा कितना लगेगा सर?
डॉक्टर- 5-6 हजार मांगता है, पर मेरे बारे में बोलिएगा, कुछ सस्ता कर देगा।
रिपोर्टर- सर पैसा के लिए कोई दिक्कत नहीं, रिपोर्ट सही आनी चाहिए कि लड़का है कि लड़की।
डॉक्टर- आप जाइए तो, मेरा सारा जांच वहीं (भखरुआ मोड़ के पास) जाता है। रिपोर्ट में कोई दिक्कत नहीं।
अल्ट्रासाउंड सेंटर पर रिपोर्ट की गारंटी भी दी
भखरुआ मोड़ के पास मां विंध्यवासिनी अल्ट्रासाउंड केन्द्र पर
टेक्निशियन ने कहा- डॉक्टर साहब से बात हो गई है न...
टेक्निशियन- 4500 रुपया जमा कीजिए। डॉक्टर साहब के कहने पर हम 500 रुपया छोड़ दिए हैं। इससे ज्यादा नहीं छोड़ पाएंगे।
रिपोर्टर- ठीक है सर, लेकिन रिपोर्ट सही बता दीजिएगा।
टेक्निशियन- रिपोर्ट के कारण ही तो लोग गली में चलकर आते हैं। डेहरी का रिपोर्ट फेल हो गया है, लेकिन आज तक यहां का शिकायत नहीं है।
रिपोर्टर- ये बात डॉक्टर साहब बोल रहे थे।
टेक्निशियन- डॉक्टर साहब को मेरे रिपोर्ट पर भरोसा है, तभी तो यहां भेजते हैं। उनका सारा रिपोर्ट यहीं आता है।
भखरुआ मोड़ के पास मां विंध्यवासिनी अल्ट्रासाउंड सेंटर।
राजधानी के पास भी नहीं बदले हालात
पटना में दानापुर के भुसौला स्थित हिंद क्लीनिक में पति जांच करता है और पत्नी अबॉर्शन। गर्भपात का रेट गर्भ के समय के हिसाब से...
रिपोर्टर: लेडीज नहीं हैं डॉक्टर साहब? पहले आया था तो लेडीज से बात हुई थी।
स्टाफ: क्या बात है? बताइए।
रिपोर्टर: तीन बेटी पहले से है, अब फिर पेट से है। देखना है कि क्या है अंदर। कितना पैसा लगेगा?
स्टाफ: जांच के लिए 2000-2500 रुपए लगेगा।
रिपोर्टर: उसके आगे की प्रोसेसिंग?
पति: वो मैडम करती हैं। 7,8, 9 महीने तक का काम हो जाएगा।
रिपोर्टर: रिस्क वाली बात कोई नहीं होगी न?
पति: रिस्क वाली बात कोई नहीं है, जितना समय होता है, उतना ज्यादा पैसा लगता है।
रिपोर्टर: मैडम का नाम सुनीता है?
पति: सुनीता नहीं, उर्मिला नाम है।
रिपोर्टर: मैडम ही करती हैं या कोई कोई?
पति: इमरजेंसी होती है, तो पीएमसीएच से बड़े डॉक्टर आते हैं। (कंप्यूटर स्क्रीन) पर बैठा देंगे।
...और अल्ट्रासाउंड के 5 मिनट बाद,जब चाहेंगे, हो जाएगा एबॉर्शन
रिपोर्टर- क्या दिखा रहा है सर?
टेक्निशियन- अभी बच्चा छोटा है, 10 दिन बाद पता चलेगा।
रिपोर्टर- ऐसा क्यों सर?
टेक्निशियन- बच्चा का ग्रोथ नहीं हुआ है। इसीलिए ऐसा हो रहा है। इनको विटामिन खिलाना होगा।
रिपोर्टर- फिर कब आना होगा सर?
टेक्निशियन- 5 फरवरी को नाश्ता कराकर लेते आइएगा।
रिपोर्टर- अभी वाला रिपोर्ट दीजिएगा?
टेक्निशियन- इसका रिपोर्ट कहीं मिलता है! कोई कोना में इसका रिपोर्ट नहीं देगा। आपको व डॉक्टर को बता देंगे।
रिपोर्टर- इ तो हेडक हो गया सर। लेट होने पर एबॉर्शन कैसे होगा?
टेक्निशियन- हेडक का कोई बात नहीं। एबॉर्शन आठ माह तक के बच्चा का होता है। लाइएगा हम सब करवा देंगे। किसी से यह सब बात मत बताइएगा। नहीं तो दिक्कत होगा।
ये ज्यादा जघन्य हत्या है, फिर इसमें सिर्फ 3 साल की सजा क्यों?
(सतीश सिंह, संपादक) अगर हम लिखें कि राज्य में भ्रूणहत्या हो रही है... तो आप शायद इसे अनदेखा कर दें। लेकिन अगर हम लिखें कि बिहार के अल्ट्रासाउंड सेंटर ही दावा करते हैं कि राज्य में रोज 72 यानी हर साल 26000 से अधिक अजन्मी बच्चियों की हत्या की जा रही है...तो आप चौंक जाएंगे। दोनों वाक्य में एक ही तथ्य हैं, फर्क है कि पहले भ्रूण शब्द का प्रयोग किया और दूसरी बार बच्चियों की हत्या कहा और एक आंकड़ा जोड़ा। सिर्फ ‘भ्रूण’ के स्थान पर ‘बच्चियों’ शब्द के प्रयोग से संवेदनाएं जग जाती हैं, ये मनोवैज्ञानिक तथ्य है।
लेकिन क्या केंद्र सरकार अब तक इस मनोवैज्ञानिक तथ्य को नहीं समझ पाई है। फर्स्ट डिग्री मर्डर यानी हत्या की बात साबित हो जाए तो कम से कम उम्रकैद और फांसी तक की सजा का प्रावधान है। मगर भ्रूण हत्या की बात साबित हो जाए तो सिर्फ तीन साल की सजा या जुर्माना या दोनों...।
एक व्यक्ति तो हत्यारे से संघर्ष कर सकता है, मगर एक अजन्मी बच्ची तो कभी अपने हत्यारे को देख तक नहीं पाती। देखा जाए तो ज्यादा सोचा-समझा और संगीन जुर्म तो इन अजन्मी बच्चियों की हत्या है। क्योंकि यहां हत्या की सुपारी देने वालों में उसके अपने हैं और हर हत्यारा वह शख्स है जिसने जिंदगियां बचाने की शपथ ली है। फिर भी इन मामलों में अमूमन तो केस दर्ज ही नहीं होता, हो भी जाए तो आरोप साबित होना और सजा मिलना असंभव-सा है। स्थिति ये कि जहां रोज भ्रूण हत्या हो रही है, वहां सजा कब-किसे हुई, किसी को ध्यान नहीं।
दुष्कर्म के मामले में निर्भया केस के बाद सरकार ने कानून में संशोधन कर 10 साल तक की कैद को फांसी तक की सजा में तब्दील कर दिया। तो फिर भ्रूणहत्या के मामले में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? जब नाबालिग से दुष्कर्म के मामले को ज्यादा गंभीर मानते हुए नया पॉक्सो एक्ट लाया जा सकता है तो अजन्मी बच्ची की हत्या में सख्ती क्यों नहीं बरती जा सकती? ऐसा नहीं कि ऐसे केस सिर्फ ग्रामीण या अशिक्षित लोगों के बीच ही है। शहरों और पढ़े लिखे लोग ये अपराध ज्यादा कर रहे हैं।
2011 की जनगणना के मुताबिक देश में लिंगानुपात में बिहार की स्थिति निचले पायदानों के 6 राज्यों में से एक है। वहीं राज्य में प्रमुख शहरी इलाकों में से एक भागलपुर की स्थिति सबसे खराब (879) है और राजधानी पटना खराब जिलों में छठे स्थान पर है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-3 (2005-06) में लिंगानुपात 902 था। नीतीश सरकार के प्रयास से ये नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-2016) में 934 हो गया।...लेकिन अब इसमें और ठाेस कदम की जरूरत है।
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कोरोना वैक्सीन कोई भी खोजे, पर भारत में बने तभी दुनिया को ज्यादा फायदा, सस्ती और आसानी से मिलेगी: स्वामीनाथन
कोरोना का संक्रमण कब खत्म होगा, वायरस के लिए कौन है जिम्मेदार, दवा या वैक्सीन बाजार में कब आ सकती है, डब्ल्यूएचओ की टीम जांच के लिए अभी तक चीन क्यों नहीं जा पाई? इन सवालों के जवाब दुनियाभर के लोग जानना चाहते हैं। इन्हीं सवालों को लेकर भास्कर के वरिष्ठ संवाददाता पवन कुमार ने डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन से बात की। पढ़िए बातचीत के मुख्य अंश...
सवालः डब्ल्यूएचओ यह बताने की स्थिति में है कि दुनिया कोरोना की चपेट में कैसे आई, कहां चूक हुई?
जवाबः डब्ल्यूएचओ समेत अधिकांश देशों को पता था कि इस तरह का वायरस किसी भी वक्त दुनिया को चपेट में ले सकता है। इसके लिए डब्ल्यूएचओ और अन्य कई एजेंसियां 15-20 सालों से सचेत कर रही थीं, पर इसे बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लिया गया। किसी भी देश ने तैयारी नहीं की, इसलिए समस्या बढ़ गई।
सवालःयदि चीन वायरस के बारे में समय से जानकारी साझा करता तो क्या स्थिति ऐसी भयावह होती?
जवाबःचीन ने पिछले साल 31 दिसंबर को इंफ्लुएंजा जैसी बीमारी के बारे में बताया, 4 जनवरी को डब्ल्यूएचओ ने भी इसकी जानकारी दी और 11 जनवरी को कोरोना की पुष्टि भी कर दी थी। फरवरी में डब्ल्यूचओ की टीम 10 दिनों के लिए चीन गई थी। पर इस दौरान सिर्फ क्लीनिकल और एपिडेमियोलॉजिकल स्टडी हुई थी।
सवालःकितने देश कोरोना की दवा-वैक्सीन बनाने पर काम कर रहे हैं?
जवाबः25-30 देश वैक्सीन पर काम कर रहे हैं। कुछ एडवांस स्टेज पर हैं, कुछ का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। अभी नहीं कह सकते कि वैक्सीन इंसान पर कारगर होगी या नहीं। मॉनिटरिंग जारी है। कोई भी देश वैक्सीन तैयार करे, उत्पादन भारत में होगा तभी दुनिया को यह सस्ता, जल्दी और आसानी से मिल पाएगा।
सवालःअमेरिका समेत कई देश वायरस को लेकर चीन पर आरोप लगा रहे हैं, जांच क्यों नहीं हो पा रही है?
जवाबःऐसी बात नहीं है, पहले भी टीम गई थी और वैज्ञानिकों की एक टीम जल्द चीन जाने वाली है, जो वायरस की उत्पत्ति के बारे में जांच करेगी। इसमें अमेरिका, अफ्रीका, रूस के वैज्ञानिक भी शामिल हैं। वायरस कैसे इंसानों में पहुंचा, इसकी भी जांच होगी। अभी तक की स्टडी से यह पता चला है कि यह चमगादड़ से मनुष्य में आया।
सवालःकब तक कोरोनावायरस परेशान करता रहेगा?
जवाबःअलग-अलग देशों में 2021 के अंत तक यह वायरस परेशान कर सकता है। वैक्सीन बन गई तो राहत मिल सकती है। मुंह-नाक ढंकने से संक्रमण का प्रसार 50% तक कम कर सकते हैं। जरा भी लापरवाही हुई तो स्थिति पूरी तरह से बदल सकती है।
सवालःबीसीजी वैक्सीन और एचसीक्यू कारगर हैं?
जवाबःइसका अभी कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। एशियाई देशों में मामले कम हैं, इसकी वजह वहां की तैयारियां हो सकती हैं। आने वाला समय कैसा रहेगा, अभी नहीं कह सकते।
सवालःकोरोना को लेकर अब डब्ल्यूएचओ की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
जवाबःवैक्सीन आने तक मुस्तैद रहना होगा। मेंटल हेल्थ, घरेलू हिंसा, बच्चों के प्रति अपराध रोकना बड़ी चुनौती है। कोरोना के कारण अन्य बीमारियों और वैक्सीनेशन से ध्यान हटा है। इससे मीजल्स, डायरिया, निमोनिया और टीबी से ज्यादा बच्चों की मौत हो सकती है।
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