Wednesday, September 30, 2020

लाखों की नौकरी छोड़ ऑर्गेनिक अमरूद की बागवानी शुरू की, एक सीजन में 12 लाख रु. की कमाई, 5 लोगों को रोजगार भी दिया

महाराष्ट्र के सांगली जिले के अंकलखोप गांव के रहने वाले शीतल सूर्यवंशी एमबीए करने के बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते थे। लाखों की सैलरी थी, 6 साल तक उन्होंने अलग-अलग पोस्ट पर काम किया। लेकिन, 2015 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी और ऑर्गेनिक अमरूद की बागवानी का बिजनेस शुरू किया। आज हर दिन 4 टन अमरूद उनके बगीचे से निकलता है। मुंबई, पुणे, सांगली सहित कई शहरों में वे अमरूद भेजते हैं। एक सीजन में 12 लाख रुपए की कमाई हो रही है।

34 साल के शीतल के पिता किसान हैं। दो भाई जॉब करते हैं, एक डॉक्टर है और दूसरा आर्किटेक्ट। शीतल कहते हैं, ' जब नौकरी छोड़कर खेती करने का फैसला लिया तो परिवार ने विरोध किया। उनका कहना था कि अच्छी खासी नौकरी छोड़कर खेती क्यों करना चाहते हो, खेती में मुनाफा ही कितना है..?

वो कहते हैं कि हम जहां रहते हैं वहां के ज्यादातर किसान गन्ने की खेती करते हैं। मेरे पिता भी गन्ने की खेती करते थे लेकिन इसमें ज्यादा मुनाफा नहीं होता था। ऊपर से समय भी ज्यादा लगता था। एक फसल तैयार होने में 15-16 महीने लग जाते थे। साथ ही फैक्ट्री में बेचने के बाद पैसे देर से अकाउंट में आते थे।

2015 में शीतल ने नौकरी छोड़ दी और ऑर्गेनिक अमरूद की बागवानी का बिजनेस शुरू किया।

इसलिए मैंने सोचा कि कुछ अलग करने का रिस्क लिया जाए। बाकी किसान तो गन्ना बो रहे हैं लेकिन हम दूसरी फसल लगाएंगे। शुरुआत मैंने अंगूर से की लेकिन इसमें कुछ खास मुनाफा नहीं हुआ। इसी बीच मेरा एक दोस्त मुझसे मिला। शिरडी में अमरूद की उसकी नर्सरी थी। उसने मुझे ऑर्गेनिक अमरूद उगाने का आइडिया दिया। इसके बाद मैं शिरडी गया, वहां के बागानों में गया और अमरूद की खेती को सीखा।

शीतल बताते हैं' 'जब मैंने अपने पिता को अमरूद उगाने के बारे में बताया तो उन्होंने मना कर दिया। वो नहीं चाहते थे कि गन्ने की जगह हम किसी और फसल को उगाने का जोखिम लें। फिर मैंने उन्हें समझा बुझाकर दो एकड़ जमीन पर अमरूद लगाने फैसला किया। इसके बाद मैं अलग-अलग शहरों में गया। वहां अमरूद के मार्केट, कहां कितनी डिमांड है और वहां तक हमें पहुंचने का रास्ता क्या होगा, मिट्टी कैसी होनी चाहिए, प्लांट की कौन सी नस्ल ठीक होगी, इन सब चीजों को लेकर कुछ दिन रिसर्च की।'

वो बताते हैं,' अगस्त 2015 में मैंने 2 तरह की अमरूद की फसल लगाई। एक ललित और दूसरी किस्म जी विलास की। पहले साल ही 20 टन का प्रोडक्शन हुआ था। 3-4 लाख रु की आमदनी हुई थी। इससे हमारा मनोबल बढ़ा और अगले सीजन से हमने और ज्यादा जमीन पर अमरूद उगाने का प्लान बनाया।'

वे केमिकल फर्टिलाइजर की जगह जैविक खाद का उपयोग करते हैं। पेड़ की सड़ी पत्तियों को गड्ढा खोदकर नीचे डाल देते हैं।

शीतल आज 4 एकड़ जमीन पर अमरूद उगा रहे हैं। 5 लोग उनके साथ काम करते हैं। हर एकड़ में 10 टन अमरूद निकलता है। अभी तीन प्रमुख किस्म ललित, जी बिलास और थाईलैंड पिंक का उत्पादन होता है। ललित की साइज छोटी होती है, जबकि जी बिलास और थाईलैंड पिंक का साइज बड़ा होता है।

शीतल बताते हैं,' गन्ने की खेती में टाइम तो ज्यादा लगता ही था, साथ ही पानी ज्यादा देना होता था। ऊपर से हर साल कल्टीवेशन की जरूरत होती थी। लेकिन, अमरूद की खेती में ऐसा नहीं होता है। एक बार प्लांट लगा दिया तो 10-12 साल की छुट्टी हो गई। इससे हर साल प्लांटेशन में होने वाला खर्च बचता है।

शीतल कहते हैं कि पिछले साल बाढ़ आई थी तो हमें नुकसान हुआ था। इस बार जब कोरोना के चलते लॉकडाउन लगा तो ज्यादा घाटा हुआ। 4-5 टन अमरूद पक के सड़ गया, उसे हम मार्केट में नहीं ले जा पाए। लेकिन, अब जुलाई के बाद से हालात सामान्य हो रहे हैं और धीरे-धीरे सबकुछ पटरी पर वापस लौट रहा है। अब मार्केट में वापस से हम अमरूद की सप्लाई कर रहे हैं।

वो कहते हैं कि हर साल काफी संख्या में अमरूद पक कर नीचे गिर जाते हैं, कई बार पूरे अमरूद बिक भी नहीं पाते। इसलिए आगे हम एक प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के बारे में विचार कर रहे हैं ताकि इन अमरूदों से दूसरे प्रोडक्ट तैयार किया जा सके।

आज हर दिन 4 टन अमरूद उनके बगीचे से निकलता है। उन्होंने तीन किस्म की अमरूद अपने बगीचे में लगाए हैं।

कैसे करें ऑर्गेनिक अमरूद की खेती

शीतल बताते हैं कि ऑर्गेनिक अमरूद की बागवानी शुरू करने से पहले रिसर्च जरूरी है। आपको जहां खेती करनी है वहां के मार्केट, डिमांड और ट्रांसपोर्टेशन के बारे में जानकारी होनी चाहिए। इसके साथ ही हम जिस जमीन पर बागवानी शुरू करने जा रहे हैं वो कम पानी वाली होनी चाहिए। हमें केमिकल फर्टिलाइजर की जगह ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर का उपयोग करना चाहिए। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है। दो पौधों के बीच 9/6 की दूरी होनी चाहिए। जुलाई से सितंबर के महीने पौधे लगाए जाते हैं।

कितना वक्त लगता है एक पौधे के तैयार होने में

अच्छे किस्म की अमरूद के पौधे लगभग एक साल में तैयार हो जाते हैं। पहले साल में एक पौधे से 6-7 किलो तक अमरूद निकलता है। उसके कुछ समय बाद 10-12 किलो तक उत्पादन होने लगता है।

क्या- क्या सावधानियां जरूरी है
शीतल बताते हैं कि अमरूद की बागवानी के लिए सही समय और सही मिट्टी का होना जरूरी है। हमें कम पानी वाली मिट्टी पर इसकी प्लांटिंग करनी चाहिए। इस पर क्लाइमेट और बारिश का असर ज्यादा होता है, इसलिए उसके लिए पहले से तैयारी जरूरी है। ज्यादा प्रोडक्शन के लिए अक्सर लोग केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग करने लगते हैं। लेकिन, हमें इससे बचना चाहिए। इससे प्लांट को नुकसान तो होता ही है साथ ही हमारी जमीन की सेहत के लिए भी ये ठीक नहीं होता है।

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महाराष्ट्र के सांगली जिले के अंकलखोप गांव के रहने वाले शीतल सूर्यवंशी ऑर्गेनिक अमरूद की बागवानी करते हैं।


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बीते 50 सालों में 70% बीमारियां जानवरों से फैली हैं, इसीलिए रिसर्च कहती हैं कि बचना है तो डाइट में फल-सब्जियां आज से ही बढ़ा लें

वायरस के संक्रमण से बचना है तो वेजिटेरियन डाइट ही सेफ विकल्प है। स्वाइन फ्लू से लेकर कोरोना का संक्रमण फैलाने तक में जानवर एक बड़ी कड़ी साबित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है, पिछले 50 सालों में 70 फीसदी वैश्विक बीमारियां जानवरों के जरिए फैली हैं।

कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि हृदय रोग, कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम करना चाहते हैं तो वेजिटेरियन डाइट लें। खाने में फल-सब्जियों की मात्रा को बढ़ाएं। आज वर्ल्ड वेजिटेरियन डे है, इस मौके पर जानिए शाकाहारी खाना आपकी जिंदगी में कितना बदलाव जाता है....


4 वजह: वेजिटेरियन खाना क्यों बेहतर है

1. वायरल डिसीज का खतरा कम हो जाता है
2013 में आई यूनाइटेड नेशंस की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन की रिपोर्ट कहती है, दुनियाभर में 90% से ज्यादा मांस फैक्ट्री फार्म से आता है। इन फार्म्स में जानवरों को ठूंस-ठूंसकर रखा जाता है और यहां साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता। इस वजह से वायरल डिसीज फैलने का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में गुजरात में फैली वायरल डिसीज कांगो फीवर में भी संक्रमित जानवरों से इंसान को खतरा बताया गया है।

2. दिल ज्यादा खुश रहता है और बीमार कम होता है
नॉनवेज के मुकाबले वेजिटेरियन डाइट आपको ज्यादा स्वस्थ रखती है, इस पर रिसर्च की मुहर भी लग चुकी है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशन में प्रकाशित रिसर्च कहती है, हृदय रोगों का खतरा घटाना है तो शाकाहारी खाना खाइए।

इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में 44,561 लोगों पर हुई रिसर्च हुई। इसमें सामने आया कि नॉन-वेजिटेरियन के मुकाबले जो लोग वेजिटेरियन डाइट ले रहे थे उनमें हृदय रोगों के कारण हॉस्पिटल में भर्ती करने की आशंका 32 फीसदी तक कम है। इनमें कोलेस्ट्रॉल का लेवल और ब्लड प्रेशर दोनों ही कम था।

3. फल-सब्जियों की मात्रा बढ़ाते हैं तो कैंसर का खतरा घटता है
अब तक सैकड़ों ऐसी रिसर्च सामने आ चुकी हैं जो कहती हैं, खाने में अगर फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाते हैं तो कैंसर का खतरा कम हो जाता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च के मुताबिक, अगर डाइट से रेड मीट को हटा देते हैं तो कोलोन कैंसर होने का खतरा काफी हद तक घट जाता है।

4. डायबिटीज कंट्रोल करना है तो 50% तक फल-सब्जियां खाएं
वियतनाम के मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. बिस्वरूप चौधरी कहते हैं, अगर ब्लड शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं तो दिनभर की डाइट में 50 फीसदी से ज्यादा फल और सब्जियां लें। इसके बाद ही अनाज शामिल करें। नॉनवेज, अंडा, मछली, मक्खन और रिफाइंड फूड लेने से बचें। ऐसा करते हैं तो ब्लड शुगर काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अब बात उस पहल की जिसके कारण यह दिन शुरू हुआ
दुनियाभर के लोगों को शाकाहारी खाना खाने के लिए प्रेरित करने और इसके फायदे बताने के लिए वर्ल्ड वेजिटेरियन डे की शुरुआत हुई। 1 अक्टूबर 1977 को नॉर्थ अमेरिकन वेजिटेरियन सोसायटी ने यह पहल शुरू की।

इस लक्ष्य लोगों को यह भी समझाना था कि वेजिटेरियन डाइट नॉनवेज फूड से ज्यादा हेल्दी है। वेजिटेरियन डाइट बॉडी में अधिक फैट नहीं बढ़ाती और हृदय रोगों का खतरा कम करती है। इसमें मौजूद फायबर और एंटीऑक्सीडेंट्स में कैंसर से लड़ने की क्षमता है।

क्या होगा अगर सभी वेजिटेरियन बन जाएं?

  • 2016 में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की एक स्टडी आई थी। इसमें कहा गया था कि अगर दुनिया की सारी आबादी मांस छोड़कर सिर्फ शाकाहार खाना खाने लगे तो 2050 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 70% तक की कमी आ सकती है।
  • अंदाजन दुनिया में 12 अरब एकड़ जमीन खेती और उससे जुड़े काम में इस्तेमाल होती है। इसमें से भी 68% जमीन जानवरों के लिए इस्तेमाल होती है। अगर सब लोग वेजिटेरियन बन जाएं तो 80% जमीन जानवरों और जंगलों के लिए इस्तेमाल में लाई जाएगी।
  • इससे कार्बन डाय ऑक्साइड की मात्रा कम होगी और क्लाइमेट चेंज से निपटने में मदद मिलेगी। बाकी बची हुई 20% जमीन का इस्तेमाल खेती के लिए हो सकेगा। जबकि, अभी जितनी जमीन पर खेती होती है, उसके एक-तिहाई हिस्से पर जानवरों के लिए चारा उगाया जाता है।

वेजिटेरियन और वेगन डाइट के फर्क को भी समझ लें

वेगन और वेजिटेरियन डाइट में एक सबसे बड़ा अंतर है। वेगन डाइट में ज्यादातर ऐसे फूड शामिल हैं जो पेड़े-पौधों से सीधे तौर पर मिलते हैं। वेगन डाइट में एक बात का खासतौर पर ध्यान दिया जाता है कि जो भी फूड ले रहे हैं वो रसायनिक पदार्थों से तैयार न हुए हों। यानी ऑर्गेनिक फार्मिंग से तैयार होने वाले फूड होने चाहिए।



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World Vegetarian Day 2020: What Are The Advantages Of Vegetarian Food For Your Health? Four Reasons for Going Veggie


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कॉफी के बीज खाकर पहली बार बकरियां झूमने लगीं थीं, जब इसकी भुनी खुशबू नशे की तरह चढ़ी तो ये इंसानों के भी मुंह लग गई

अमूमन लोग कॉफी तब पीते हैं, जब बॉडी में एनर्जी की कमी महसूस करते हैं या तनाव से जूझ रहे होते हैं। लेकिन, कॉफी के सबसे पुराने ठिकाने इथियोपिया में ऐसा नहीं है। यहां की हर दावत में आपको कॉफी मिलेगी। अफ्रीकी देश इथियोपिया को कॉफी का जन्मस्थल कहते हैं।

आज वर्ल्ड कॉफी डे है, इस मौके पर कॉफी के सबसे बड़े ठिकाने से जानिए 4 दिलचस्प किस्से...

1. जब कॉफी के बीज खाने के बाद बकरियां झूमने लगी थीं
इथियोपिया में कॉफी की खुशबू को कैसे पहचाना गया, इसका यहां एक सबसे दिलचस्प किस्सा मशहूर है। एक समय यहां कालदी नाम का चरवाहा अपनी बकरियों को काफा के जंगल से लेकर निकलता था। एक दिन उसने देखा, यहां जमीन पर पड़ी लाल चेरियां खाने के बाद बकरियां खुशी से झूम रही हैं। चरवाहे ने कुछ चेरियां तोड़ीं और खाईं। स्वाद पसंद आने पर चेरियों को अपने चाचा के पास ले गया।

चाचा बौद्ध धर्म के अनुयायी थे और मठ में रहते थे। उन्होंने मजहबी बंदिश के कारण कॉफी की चेरी को आग में डाल दिया। जैसे ही बीजों ने जलना शुरू किया उसकी खुशबू नशे की तरह चढ़ने लगी। इसके बाद कालदी के चाचा ने इन बीजों का इस्तेमाल खुशबू के लिए करना शुरू किया।

इन्हीं लाल चेरियों से बीज निकालकर उससे कॉफी तैयार की जाती है।

2. जले हुए कॉफी के बीजों को पानी में डाला और ऐसे हुई इसकी शुरुआत
इथियोपिया में काफा के रहने वाले मेसफिन तेकले कहते हैं, यहां कॉफी का चलन कैसे शुरू हुआ इसकी कहानी मैंने अपने दादा से सुनी थी। वह कहते थे एक बार चरवाहे कालदी की मां ने आग में जले हुए बीजों को साफ किया। फिर इसे ठंडा होने के लिए पानी में डाल दिया और तेज खुशबू आने लगी। यहीं से कॉफी पीने का चलन शुरू हुआ।

मेसफिन कहते हैं, यहां के जंगल दुनियाभर के लिए एक तोहफे की तरह हैं। दुनियाभर के लोग यहां पर उगी कॉफी की चुस्कियां लेते हैं। कॉफी यहां की मेहमान नवाजी का हिस्सा है। बचपन से लड़कियों को इसे तैयार करना सिखाया जाता है।

कॉफी सेरेमनी की तैयारी।

3. सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए 3 घंटे चलती है कॉफी सेरेमनी
इथियोपिया में हर खुशी के मौके पर कॉफी सेरेमनी आयोजित की जाती है। यह 2 से 3 घंटे का प्रोग्राम होता है। कॉफी को सर्व करने का काम घर की महिलाएं और बच्चे करते हैं। यह तैयार भी अलग तरह से होती है। कॉफी के दानों को रोस्ट करके उसे पीसते हैं और गर्म पानी के साथ मिलाते हैं। इसमें दूध नहीं मिलाया जाता है, लेकिन शक्कर की मात्रा अधिक रहती है। तैयार होने के बाद इसे सुराहीनुमा बर्तन में लाते हैं और मेहमानों को सर्व करते हैं।

4. यहां कॉफी के पेड़ लगाए नहीं जाते, अपने आप उग आते हैं
इथियोपिया के जंगल में कॉफी की 5 हजार से अधिक किस्में हैं। यहां की जमीन कॉफी के लिए इतनी उपजाऊ है कि पौधे लगाए नहीं जाते, अपने आप जमीन से उग आते हैं। यूनेस्को की रिपोर्ट कहती है, 40 साल पहले इथियोपिया के 40 फीसदी इलाकों में काॅफी के जंगल थे। अब ये घटकर 30 फीसदी रह गए हैं।

कैसे हुई इंटरनेशनल कॉफी डे की शुरुआत
इस दिन का मकसद कॉफी को प्रमोट करना और इसे एक ड्रिंक के तौर पर सेलिब्रेट करना है। इसकी शुरुआत 1 अक्टूबर 2015 को हुई जब इटली के मिलान में इंटरनेशनल कॉफी ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत हुई।

साभार : बीबीसी, होमग्राउंड्स, कम्युनिकॉफी डॉट कॉम



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International coffee day 2020 interesting fact from home of coffee Ethiopia


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कर्मचारियों के DA कटौती का आदेश वापस ले रही है मोदी सरकार? जानिए वायरल मैसेज की सच्चाई

क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के DA की कटौती का आदेश वापस ले लिया है। दावे के साथ एक आदेश की कॉपी भी वायरल हो रही है। ये आदेश 21 सितंबर का बताया जा रहा है।

दरअसल, कोविड-19 लॉकडाउन के चलते हुई आर्थिक सुस्ती को देखते हुए मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की तीन अतिरिक्त किश्तों पर रोक लगाने का फैसला लिया था। केंद्र सरकार के इस फैसले का असर 50 लाख कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ा है। अब दावा किया जा रहा है कि ये आदेश वापस ले लिया गया है।

और सच क्या है?

  • इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली, जिससे पुष्टि होती हो कि केंद्र सरकार ने DA कटौती का आदेश वापस ले लिया है।
  • वायरल हो रही चिट्‌ठी को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि ये DA कटौती वापस लेने का आदेश नहीं है। बल्कि, केंद्र सरकार में जनरल सेक्रेटरी डॉ. एम रघवैय्या द्वारा लिखा गया एक आवेदन पत्र है, जो कि वित्त मंत्री को लिखा गया है।
  • इस पत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया गया है कि वे केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को डियरनेस अलाउंस ( DA) का लाभ देने के लिए उचित कदम उठाएं। इसी आवेदन को वित्त मंत्रालय का आदेश बताकर गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।
  • न्यूज एजेंसी पीटीआई की खबर के अनुसार, डॉ. एम रघवैय्या नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन के जनरल सेक्रेटरी हैं। और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की DA कटौती वापस लेने का अनुरोध किया था। केंद्र सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक ने भी DA कटौती वापस लिए जाने वाले दावे को फेक बताया है।
  • केंद्र सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक ने भी DA कटौती वापस लिए जाने वाले दावे को फेक बताया है।


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Fact Check: Modi government withdrawing DA cut order of employees? Know the truth of viral messages


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आज इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्संस; सिविल वॉर के खत्म होने पर चीन समाजवादी रिपब्लिक बना था

संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में पूरी दुनिया में 1991 से हर साल एक अक्टूबर को इंटरनेशनल डे फॉर ओल्डर पर्संस यानी अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस या अंतरराष्ट्रीय वरिष्‍ठ नागरिक दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है बुजुर्गों को उनके अधिकार दिलवाना।

14 दिसंबर 1990 को यूनाइटेड नेशंस की जनरल असेंबली ने तय किया था कि एक अक्टूबर को इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्संस के तौर पर मनाया जाए। इससे पहले 1982 में वर्ल्ड असेंबली ऑन एजिंग ने विएना इंटरनेशनल प्लान ऑफ एक्शन ऑन एजिंग को पास किया था। एक साल बाद यूएन की जनरल असेंबली ने भी इस पर मुहर लगाई थी।

भारत में 2007 में माता-पिता एवं वरिष्‍ठ नागरिक भरण-पोषण विधेयक पारित किया गया। इसमें माता-पिता के भरण-पोषण, वृद्धाश्रमों की स्थापना, चिकित्‍सा सुविधा की व्यवस्था और वरिष्‍ठ नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है।

1949 में हुई थी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना

1912 में क्विंग राजशाही का अंत हुआ और रिपब्लिक ऑफ चीन बना। यहीं से चीन का आधुनिक इतिहास शुरू हुआ। उस समय चीन को रिपब्लिक घोषित करने वाले नेशनलिस्ट नेता थे। इस दौरान वहां कम्युनिस्ट ताकतें भी तेजी से उभरीं। 1936 में जापान के हमले के खिलाफ दोनों ने मजबूती से युद्ध लड़ा। सेकंड वर्ल्ड वॉर खत्म होने पर 1945 में जापान ने सरेंडर किया। तब कम्युनिस्ट्स और नेशनलिस्ट्स के बीच जंग छिड़ गई थी। चार साल तक देश में सिविल वॉर की स्थिति बनी रही। इस युद्ध में चीन के लाखों नागरिक मारे गए थे। 1 अक्टूबर, 1949 को माओ त्से तुंग ने कम्युनिस्ट पार्टी की जीत का ऐलान किया और संविधान में देश का नाम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना रखा।

इतिहास में आज की तारीख को इन घटनाओं के लिए याद किया जाता है...

  • 1838: भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड ऑकलैंड ने शिमला मैनिफेस्टो जारी किया, जिसकी वजह से पहला एंग्रो-अफगान युद्ध हुआ।
  • 1854ः भारत में डाक टिकट का प्रचलन आरंभ हुआ।
  • 1895ः पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान का जन्म।
  • 1945ः भारत के मौजूदा एवं 14वें राष्ट्रपति रामनाथ काेविंद का जन्म।
  • 1953ः आंध्र प्रदेश अलग राज्य बना। यह राज्य भी अब तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बंट चुका है।
  • 1960ः नाइजीरिया ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ।
  • 1967ः भारतीय पर्यटन विकास निगम की स्थापना हुई।
  • 1978ः भारत में लड़कियों की शादी की उम्र को 14 से बढ़ा कर 18 और लड़कों की 18 से बढ़ा कर 21 वर्ष किया गया।
  • 1996ः अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा पश्चिम एशिया शिखर सम्मेलन का उद्घाटन।
  • 1998ः श्रीलंका में किलिनोच्ची एवं मानकुलम शहरों पर कब्ज़े के लिए सेना एवं लिट्टे उग्रवादियों के बीच हुए संघर्ष में 1300 लोगों की मौत।
  • 2002: गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान नेवी के दो विमान फ्लायपास्ट के दौरान आपस में टकराए।
  • 2005ः इंडोनेशिया के बाली में हुए बम विस्फोट में 40 लोगों की मौत।
  • 2007ः जापान ने उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रतिबंधों को अगले छह महीनों तक बढ़ाने की घोषणा की।
  • 2008: यूएस सीनेट ने भारत के साथ परमाणु व्यापार पर लगे तीन दशक के प्रतिबंध को खत्म किया।
  • 2016: भारत ने टेलीकॉम तरंगों की सबसे बड़ी नीलामी की। पहले दिन की बिक्री से 535.31 अरब रुपए की आय हुई।
  • 2019: फोर्ड मोटर कंपनी और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने कहा कि वे भारत में जॉइंट वेंचर शुरू करेंगे।


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Today History for October 1st/ What Happened Today | International Day for Older Persons | Republic Of China Formed | Accident During Flypast in Goa


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कर्मचारियों के DA कटौती का आदेश वापस ले रही है मोदी सरकार? जानिए वायरल मैसेज की सच्चाई

क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के DA की कटौती का आदेश वापस ले लिया है। दावे के साथ एक आदेश की कॉपी भी वायरल हो रही है। ये आदेश 21 सितंबर का बताया जा रहा है।

दरअसल, कोविड-19 लॉकडाउन के चलते हुई आर्थिक सुस्ती को देखते हुए मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की तीन अतिरिक्त किश्तों पर रोक लगाने का फैसला लिया था। केंद्र सरकार के इस फैसले का असर 50 लाख कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ा है। अब दावा किया जा रहा है कि ये आदेश वापस ले लिया गया है।

और सच क्या है?

  • इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली, जिससे पुष्टि होती हो कि केंद्र सरकार ने DA कटौती का आदेश वापस ले लिया है।
  • वायरल हो रही चिट्‌ठी को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि ये DA कटौती वापस लेने का आदेश नहीं है। बल्कि, केंद्र सरकार में जनरल सेक्रेटरी डॉ. एम रघवैय्या द्वारा लिखा गया एक आवेदन पत्र है, जो कि वित्त मंत्री को लिखा गया है।
  • इस पत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया गया है कि वे केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को डियरनेस अलाउंस ( DA) का लाभ देने के लिए उचित कदम उठाएं। इसी आवेदन को वित्त मंत्रालय का आदेश बताकर गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।
  • न्यूज एजेंसी पीटीआई की खबर के अनुसार, डॉ. एम रघवैय्या नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन के जनरल सेक्रेटरी हैं। और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की DA कटौती वापस लेने का अनुरोध किया था। केंद्र सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक ने भी DA कटौती वापस लिए जाने वाले दावे को फेक बताया है।
  • केंद्र सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक ने भी DA कटौती वापस लिए जाने वाले दावे को फेक बताया है।


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रिया को हो सकती है 10 साल की जेल; बाबरी से बरी होकर आडवाणी बोले- जय श्रीराम; और नहीं टाली जाएंगी UPSC प्रिलिम्स परीक्षाएं

बाबरी मस्जिद मामले में अदालत ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि घटना पूर्व नियोजित नहीं लगती। वहीं, बरी होने के बाद एक आरोपी जय भगवान गोयल बोले कि ढांचा एजेंडे के तहत ही गिराया था। एकाएक कुछ नहीं हुआ। बहरहाल, चलिए शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ...

आज इन 7 इवेंट्स पर रहेगी नजर
1. IPL में आज मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब आमने-सामने होंगे। टॉस शाम 7 बजे होगा। मैच शाम साढ़े 7 बजे शुरू होगा।
2. आज अनुराग कश्यप को पूछताछ के लिए मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन बुलाया गया है। फिल्ममेकर सुबह 11 बजे जाएंगे।
3. झारखंड में आज से स्कूल, सिनेमाघर और धार्मिक स्थल खोलने पर निर्णय लिया जा सकता है।
4. आज से राजस्थान का रणथंभौर टाइगर पार्क खोल दिया जाएगा।
5. मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग की ऑनलाइन कक्षाएं आज से, करीब 7 लाख छात्र जुड़ेंगे।
6. पंजाब में खेती बिलों को लेकर सबसे बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। अकाली वर्कर और किसान-मजदूर मोहाली से राज्यपाल को मेमोरेंडम देने के लिए चंडीगढ़ जाएंगे।
7. आज से दुर्ग और धमतरी में लॉकडाउन होगा खत्म। दुर्ग में रात 8 बजे तक खुल सकेंगी दुकानें। साप्ताहिक बंदी का निर्णय व्यापारी खुद कर सकेंगे।

अब कल की महत्वपूर्ण 7 खबरें

1. बाबरी मामले में 28 साल बाद आडवाणी-मुरली समेत 32 आरोपी बरी
बाबरी मस्जिद ढांचा ढहाए जाने के 265 दिन बाद मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई टीम करीब 3 साल जांच करती रही। फिर सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में ही सुनवाई शुरू हुई। आखिरकार 30 सितंबर को फैसला आ गया। घटना के 28 साल बाद बाबरी से सब बरी कर दिए गए। सब यानी सभी 32 आरोपी, जो जिंदा हैं। वैसे कुल 48 आरोपी थे। इनमें से 16 अब नहीं हैं। -पढ़ें पूरी खबर

2. राम मंदिर पर 57 दिन बाद बोले आडवाणी: ‘जय श्रीराम, ये खुशी का पल है’
बाबरी विध्वंस केस में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बुधवार को लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया। फैसले के बाद लालकृष्ण आडवाणी (92) ने कहा कि यह हम सभी के लिए खुशी का पल है। कोर्ट के निर्णय ने मेरी और पार्टी की रामजन्मभूमि आंदोलन को लेकर प्रतिबद्धता और समर्पण को सही साबित किया है। -पढ़ें पूरी खबर

3. हाथरस गैंगरेप: पुलिस ने रात में खुद ही पीड़िता का शव जला दिया
हाथरस में कथित गैंगरेप पीड़ित का बीती रात पुलिस ने अंतिम संस्कार कर दिया। पीड़ित के भाई ने भास्कर से बात करते हुए कहा, 'पुलिस ने हमें उसका चेहरा तक नहीं देखने दिया। हमें नहीं पता पुलिस ने किसे जलाया।' मोदी ने योगी से कहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। राज्य सरकार ने 3 सदस्यों की एसआईटी बनाकर 7 दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। -पढ़ें पूरी खबर

4. UPSC एग्जाम पर सुप्रीम कोर्ट: लास्ट अटेम्प्ट वाले कैंडीडेट्स को एक और मौका दें
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा (प्रिलिम्स) परीक्षा 2020 पर बुधवार को कहा कि 4 अक्टूबर को होने वाले ये परीक्षाएं कोविड महामारी के कारण नहीं टाली जा सकतीं। केंद्र सरकार इस पर विचार करे कि ऐसे कैंडीडेट़्स को एक और मौका दिया जा सकता है जिनके पास अपना आखिरी अटेम्प्ट बचा है और जो कोरोना के कारण परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे। -पढ़ें पूरी खबर

5. अंगदान करेंगे अमिताभ बच्चन, ट्विटर पर लिखा- मैं अंगदान का संकल्प ले चुका हूं
अमिताभ बच्चन ने 77 साल की उम्र में अंगदान करने का संकल्प लिया है। इस बात की जानकारी उन्होंने मंगलवार देर रात ट्वीट कर दी। उन्होंने एक फोटो भी शेयर किया है, उनके कोट पर हरे रंग का रिबन लगा है, जो कि अंगदान के संकल्प का प्रतीक है। बच्चन ने अपने ट्वीट में लिखा, "मैं अंगदान का संकल्प ले चुका हूं...इसकी पवित्रता दिखाने के लिए हरे रंग का रिबन लगाया है।" -पढ़ें पूरी खबर

6. रिया को हो सकती है 10 से 20 साल की जेल
ड्रग्स मामले में मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के एडीजी अनिल सिंह ने कहा था कि रिया चक्रवर्ती का सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में छोटा सा कनेक्शन है। अब एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दैनिक भास्कर से कहा- रिया और शोविक के केस में डेढ़ किलो चरस जब्त की गई है। उन्हें 10-20 साल तक की सजा हो सकती है। -पढ़ें पूरी खबर

7. आज से होंगे 9 अहम बदलाव: बीमा पॉलिसी में अब ज्यादा बीमारियां कवर होंगी
1 अक्टूबर से देशभर में कई नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। वाहन चलाने वालों और विदेश में पैसा भेजने वालों से लेकर गूगल पर मीटिंग करने वालों तक के लिए इन बदलावों को जानना जरूरी है। इनमें गाड़ी चलाते हुए मोबाइल के इस्तेमाल का भी जिक्र है और मिठाई खरीदते समय ध्यान रखने वाली बात का भी। -पढ़ें पूरी खबर

अब 1 अक्टूबर का इतिहास
1854: भारत में डाक टिकट का प्रचलन प्रारंभ हुआ।
1949: चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का शासन आरंभ हुआ।
1967: भारतीय पर्यटन विकास निगम की स्थापना हुई।

आखिर में जिक्र मशहूर उर्दू शायर मजरूह सुल्तानपुरी का। आज ही के दिन 1919 में उनका जन्म हुआ था। पढ़िए उन्हीं का एक मशहूर शेर....



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Riya may be jailed for 10 years, Babri Masjid Demolition Case Verdict, UPSC prelims exam will not be postponed Morning news brief


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कुमार विश्वास बोले- कब तक मौन रहोगे विदुरों? कब अपने लब खोलोगे, जब सर ही कट जायेगा तो किस मुंह से क्या बोलोगे?

इस वीडियो में मैं थोड़ा ज्यादा गुस्से में आ गया, एक दो बार गला भी भर आया है😢! पर आप सब मेरे चाहने वालों से, साहित्य से, भाषा से, उसकी मर्यादा से मैं माफ़ी नहीं मांगना चाहता ! यह जनबोधी कविता, यह ग़ुस्सा मेरे वंश की परम्परा है ! जिन्हें बुरा लगा हो वे मुझे गरियाने के लिए स्वतंत्र हैं 😢🙏 ।

उपनिषद भी कहता है कि कूपमंडूक की तरह अब भी अगर हम इस अंधियारी कोठरी से बाहर नहीं निकले तो धीरे-धीरे इस अनाचारी असुर लोक के ऐसे अंधकार में प्रवेश कर जाएंगे जो स्वयं हमारे विनाश का कारण बनेगा 👎। “असूर्य नाम ते लोकाः अंधे तमसावृताः।।”

उन्नीस सौ बासठ की चीन से लड़ाई के वक्त अपनी जरूरी जिम्मेदारी से बेखबर अपनी ही सरकार से अपनी कविता “परशुराम की प्रतीक्षा” में जब राष्ट्रकवि दिनकर जी ने सवाल पूछा था तो एक पंक्ति लिख दी थी, “छागियो करो अभ्यास रक्त पीने का !”

अपनी डायरी में दिनकर जी ने लिखा है कि मुझे एक शालीन कवि होने के नाते रक्त पीने जैसी बात शायद नहीं लिखनी चाहिए थी पर मैंने इसलिए लिख दी है ताकि आने वाले कल में इतिहास याद रखें कि जब सब सरकारी सरोकारी लोग मौन थे तो इस देश के एक कवि को इतना गुस्सा आया था कि उसने रक्त पी जाने जैसी कामना कर डाली थी !

🇮🇳😢 "कब तक मौन रहोगे विदुरों? कब अपने लब खोलोगे ? जब सर ही कट जायेगा तो किस मुंह से क्या बोलोगे..?”

वीडियो में कुमार विश्वास ने लगातार 19 मिनट तक हाथरस रेप केस को महाभारत की कथा और भारत की वर्तमान स्थिति से जोड़ा और नेताओं को जमकर कोसा। कुमार ने सवाल उठाए कि इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी लोग सवाल क्यों नहीं उठा रहे?


बकौल कुमार -

हर बार की तरह शुरुआत करते समय जय हिंद कहने में समस्या है। क्योंकि, हिंद भी अगर सुनता होगा और देश भी कभी सुनता होगा तो वो भी आपसे पूछता हाेगा कि मेरी जय कहने का तुम्हें अधिकार है या नहीं। जब बचपन में मैं महाभारत की पूरी कहानी अपनी दादी से सुनी थी, पिता से सुनी थी तो अक्सर सोचता था कि इतने नीतिज्ञ, इतने पढ़े-लिखे इतने विराट व्यक्तित्व के लोग एक ही सभाग्रह में उपस्थित थे। जहां चाहे द्वेष था, वैमनस्य था, ईर्ष्या थी, दोनों दलों के लोगों में एक-दूसरे के प्रति घृणा थी। ऐसा क्या हुआ होगा कि एक कुलवधु, जो बड़े आदर स्नेह के साथ उस परिवार में आई हो। जहां उसने भीष्म के चरण छुए हों, जिसने गुरुवर द्रोणाचार्य की पूजा की हो, महात्मा विदुर में पिता दिखाई दिए हों, जिसमें दुर्योधन में अपना देवर दिखाई दिया हो। जिसमें कृपाचार्य में अपना रिश्तेदार दिखाई दिया हो। उस पूरे परिवार में पूरे वंश में चाहे कितनी भी घृणा थी, कितना भी द्वेष हो, लेकिन ऐसा कैसे हो हुआ कि स्त्री को बालों से खींचकर सभाग्रह में लाया गया और सबने उसका चीरहरण किया।
सबसे बड़ी बात ये है कि कोई इस पर बोला नहीं। जिन लोगों ने उसे दांव पर लगाया वो तो अपराधी थे ही। लेकिन, मुझे उन लोगों पर दुख नहीं आता था, मुझे गुस्सा आता था भीष्म पर, द्रोणाचार्य पर, गुस्सा आता था कृपाचार्य पर। फिर मेरी छाती चौड़ी होती थी महात्मा विदुर के लिए। कि कोई एक आदमी ताे है जो खड़ा होकर धृतराष्ट्र से पूछ रहा है कि मेरी सिंहासन के प्रति पूरी निष्ठा है, लेकिन ये सवाल तो पूछूंगा ही कि आखिर ये हो क्या रहा है?
जिस समय विदुर सवाल पूछ रहे थे तो दुर्याेधन के चमचों ने उन्हें हस्तिनापुर का विद्रोही बताया था। और यह चमचों की छाप होती है कि अपने दुर्योधनों को बचाने के लिए और धृतराष्ट्रों को बचाने के लिए उनके अंधेपन को उस देश के ऊपर मढ़ देते हैं और कह देते हैं कि आप देश के खिलाफ जा रहे हैं। मैं बार-बार कहता हूं कि नंद मगध नहीं है। मगध था, है और रहेगा। भारत था, है और रहेगा। सरकारें आएंगी और जाएंगी, लेकिन ये देश रहेगा।
महाभारत में सवाल नहीं पूछा गया। लेकिन हमारी कविता ने कहा- अधिकार खोकर बैठे रहना, ये महादुष्कर्म है। न्यायार्थ अपने बंधकों को भी दंड देना धर्म है। इस हेतु ही तो कौरवों-पांडवों का रण हुआ, जो भव्य भारतवर्ष के कल्पांत का कारण हुआ।
बेटियों की, कुलवधुओं की, बहनों की चीखों पर खामोश होने जाने वाले हस्तिनापुर अक्सर खंडहर में बदल जाते हैं। लाशों पर रोने वाला कोई नहीं बचता। और ये जो पिछले दो दिन से देख रहा हूं कि सरकारें और सत्ताएं और उनका समर्थन करने वाले लोग, मैं आप सबसे प्रार्थना करता हूं कि आप किसी भी पार्टी के हों। उसके पूरे अच्छे से भक्त बनकर रहिए। चमचे बनकर रहिए। समर्थक बनकर रहिए। अगली बार भी इन्हें ही वोट दे दीजिए। पर क्या वोट देने से सवाल पूछने का अधिकार खत्म कर दिया है।
सवाल नहीं पूछेंगे तो ये अहंकारी हो जाएंगे, इन्हें लगेगा कि सब ठीक है। आप सबसे कहता हूं कि अपनी पार्टी से सवाल पूछिए। उन महिलाओं से सवाल पूछिए, जो बहुत ही सिलेक्टिव अप्रोच दिखाती हैं। उन जया बच्चन से सवाल कीजिए, जो आजम खान के अधोवृद्ध पर टिप्पणी करने पर चुप रह जाती हैं और मुंबई में कुछ होता है तो संसद में उसके खिलाफ बोलती हैं। स्मृति ईरानी से सवाल कीजिएगा कि जो हैदराबाद की बेटी पर तो आंसू बहाती हैं, लेकिन उन्नाव में उनका विधायक बिटिया के साथ दुष्कर्म कर उसे मारने की कोशिश करता है तो चुप रह जाती हैं। चिन्मयानंद पर चुप रह जाती हैं। बहनों, बेटियों, मांओं से कह रहा हूं कि आप सब पूछिए कि ये लोग चुप क्यों हैं?
इसलिए इस बिके हुए समय में जब सब बिके हुए हैं, आप और हम बचें हैं सामान्य नागरिक बोलेंगे तो सरकारें सुनेंगी। इनकी औकात नहीं है। अन्ना हजारे ठीक कहते थे, इनकी नाक दबाओ तो मुंह खुलता है। इनकी नाक दबाइए, इनका मुंह खुलेगा। आखिर में गुस्से में ऐसी कोई बात की हो जो आपको बुरी लगी तो क्षमा कीजिएगा। लेकिन बहुत कष्ट है। एक कवि हबीब जालिब पाकिस्तान पंजाब से थे। उन्होंने एक मुशायरे में जिया उल हक के वक्त में एक नज्म पढ़ी थी। तो वो नज्म पढ़ना शुरू की तो नीचे से किसी शायर ने उनका पजामा खींचा और कहा कि अभी वक्त नहीं है। तो उन्होंने कहा कि मैं वक्त देखकर तेवर बदलने वाला शायर नहीं हूं। उन्होंने कहा-

दीप जिस का महल्लात ही में जले
चंद लोगों की ख़ुशियों को ले कर चले
वो जो साए में हर मस्लहत के पले
ऐसे दस्तूर को सुब्ह-ए-बे-नूर को
मैं नहीं मानता मैं नहीं जानता


थोड़े दिनों के लिए, कुछ सालों के लिए दलित, हिंदू-मुस्लिम, ठाकुर बनिया, इन सब विमर्श से बाहर आइए, और देश का विमर्श संभालिए। बहुत मुश्किल वक्त है। फिक्र कर सकें तो बहुत अच्छा है और न कर सकें तो एक हजार साल में गुलामी गई है। फिर आपसे भी सवाल पूछा जाएगा आने वाले कल में..



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Kumar Vishwas said - how long will Vidro remain silent? When will you open your lips, when your head is cut, with what mouth will you speak?


from Dainik Bhaskar /national/news/kumar-vishwas-comments-on-hathras-rape-case-with-his-special-video-127767451.html

Tuesday, September 29, 2020

हमारा सवाल है कि क्या सुधारों को हमारी राजनीति के केंद्र में लाया जा सकता है? या, इन्हें किस्तों में और चोरी से लागू करने का सिलसिला जारी रहेगा

कई बार राजनीतिक टिप्पणीकारों पर बुद्धिजीवी जिमनास्ट कहकर व्यंग्य कसा जाता है। तो हम इसी छवि के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय विवाद ट्रिब्यूनल द्वारा 20,000 करोड़ के टैक्स मामले में वोडाफोन के पक्ष में दिए गए फैसले और बिहार में होने वाले चुनावों के बीच संबंध स्थापित कर रहे हैं। ये दोनों ही मामले पुरानी के मुकाबले नई अर्थव्यवस्था और नई राजनीति के लिए एक चुनौती और अवसर उपलब्ध कराते हैं।

वोडाफोन का यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब पिछले तीन दशकों से अर्थव्यवस्था और राजनीति के पुराने तरीकों के सबसे बड़े पक्षकार प्रणब मुखर्जी का निधन हुआ है। उनके साथ कई दशकों में हुई बातचीत के आधार पर मैं कह सकता हूं कि ट्रिब्यूनल के फैसले पर भी उनकी प्रतिक्रिया काफी गुस्से भरी होती और वे यह कहते कि हम एक संप्रभु राष्ट्र है और यह फैसला देने वाले वे कौन होते हैं। वह तत्काल ही इस फैसले को चुनौती देते और पूरे गणराज्य की ताकत इसके पीछे लगा देते।

फिर बिहार चुनाव मोदी सरकार के उन सुधारों के बाद हो रहे पहले चुनाव हैं, जिनपर गर्व करते हुए वह अपने विरोधियों पर तंज कसती है: आप कहते थे कि हमने कोई बड़ा सुधार नहीं किया? आप इनके बारे में क्या कहेंगे? कृषि और श्रम से जुड़े इन दोनों ही सुधारों से आर्थिक संकट से जूझ रहे वोटरों के बड़े हिस्से में कुछ समय के लिए नाराजगी उत्पन्न हो सकती है।

यह देखना रोचक होगा कि मोदी और अमित शाह बिहार चुनाव अभियान कैसे तैयार करते हैं। क्या वे इन सुधारों व जोखिम लेने की क्षमता का प्रचार करेंगे? या सिर्फ महामारी के दौरान बांटे गए अनाज और पैसों की बात करेंगे? राजनीतिक अनुभव कहता है कि चुनाव प्रचार में सुधार या भविष्य में संपन्नता के वादे टालने चाहिए। वह पुरानी गरीबी ही है, जो वोट दिलाती है। एक खराब अर्थव्यवस्था के बावजूद मोदी की 2019 की जीत में काफी हद तक घरेलू गैस, शौचालय और मुद्रा ऋण जैसी योजनाओं की भूमिका थी, जिन्होंने गरीबों पर असर डाला। बड़े व गरीब राज्य बिहार में मोदी कौन-सी राह चुनेंगे?

वोडाफोन पर आदेश और बिहार चुनाव मोदी के सामने दोहरी चुनौती पेश करते हैं। पुरानी अर्थव्यवस्था व पुरानी राजनीति तो कहती है कि वह ट्रिब्यूनल के ऑर्डर को चुनौती दें और बिहार में सौगात बांटने की बात करें। लेकिन, अगर यदि वह साहस दिखाएंगे तो वोडाफोन मामले में निर्णय को मानेंगे और बिहार में सुधार व संपन्नता के आधार पर प्रचार करेंगे। परंतु यह बिहार में मोदी के गठबंधन को चुनाव जीतने की गारंटी देगा या नहीं, हम नहीं कह सकते। नई अर्थव्यवस्था के खिलाफ पुरानी राजनीति के जबरदस्त तर्क हैं। सुधारों का दर्द तत्काल होता है और यह अनेक लोगों को प्रभावित करते हैं।

इसका फायदा बहुत बाद में होता है और इसके बाद भी यह अनेक को नाखुश छोड़ देता है। यूपीए के सत्ता में आने के बाद जब बिल क्लिंटन 2006 में भारत आए तो उन्होंने राष्ट्रपति भवन में अपने भाषण में इस बात को अच्छे से बताया। उन्होंने कहा कि हम सभी चकित हैं कि वाजपेयी सरकार भारत की विकास दर को सात फीसदी पर पहुंचाने के बाद भी चुनाव हार गई। जब आपकी विकास दर इतनी ऊंची हो तो आप चुनाव कैसे हार सकते हैं? क्योंकि इससे फायदे में दिखने वाले लोग पीछे छूट गए लोगों की तुलना में बेहद कम होते हैं।

यह राजनीति की कड़वी सच्चाई है। देश का शहरी मध्य वर्ग, जो बीते तीन दशक में मनमोहन सिंह और कांग्रेस के कारण समृद्ध हुआ, उसने 2014 में भाजपा को जमकर वोट दिया। वाम दलों और लालू प्रसाद यादव द्वारा अपने-अपने राज्यों में दशकों तक आधुनिकीकरण और वृद्धि को नहीं आने देने की यह एक वजह हो सकती है। उन्होंने लोगों को जाति और विचारधारा के बंकर में ही सड़ने दिया।

बिहार की राजनीति में हमेशा जटिल व स्थानीय मुद्दे हावी रहे हैं। परंतु यह चुनाव एक बुरे दौर में हो रहा है। बढ़ती महामारी, चीन समस्या और अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट है। साथ ही यह अनुभव कि सुधार और वृद्धि की बातें चुनाव में काम नहीं आतीं। खासतौर पर जब आप दोबारा जीतना चाहते हों। आप यह पूछें कि क्या मोदी ने 2014 में वृद्धि का वादा नहीं किया था तो हम बता दें कि तब वह तत्कालीन सत्ता को चुनौती दे रहे थे। 2019 में दोबारा जीतने के लिए लड़े तो मुद्दा पाकिस्तान और भ्रष्टाचार थे।

2004 में वाजपेयी इंडिया शाइनिंग के प्रचार के बावजूद चुनाव हार गए थे। कांग्रेस भी मानती है कि वह 1996 और 2014 का चुनाव सुधारों के कारण ही हारे। फिर मोदी जोखिम क्यों लेंगे? यदि वह सही मायनों में सुधारक और न्यूनतम सरकार में विश्वास करने वाले व्यक्ति हैं तो उन्हें वोडाफोन के भूत को दफन कर देना चाहिए। फिर वे बिहार में अपने राजनीतिक रूप से विवादास्पद सुधारों के साथ चुनाव करें।

इन दोनों कामों के लिए उन्हें अपनी राजनीतिक पूंजी दांव पर लगानी होगी। वह ऐसा कर पाते हैं या नहीं इससे ही हमारे मुख्य सवाल का जवाब मिलेगा। हमारा सवाल है कि क्या सुधारों को हमारी राजनीति के केंद्र में लाया जा सकता है? अन्यथा, इन्हें किस्तों में और चोरी से लागू करने का सिलसिला जारी रहेगा। (ये लेखक के अपने विचार हैं)



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शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’


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मोदी और उनके रणनीतिकारों को लगता है कि यह किसान आंदोलन न बहुत दूर तक जाएगा और ना ही दूर तक फैलेगा

नरेंद्र मोदी के साढ़े छह साल के कार्यकाल में उनके खिलाफ दूसरा किसान आंदोलन शुरू हो गया है। पहला आंदोलन तब हुआ था जब 2014 में सत्ता में आने के फौरन बाद मोदी ने अध्यादेश लाकर कॉर्पोरेट इस्तेमाल के लिए उनकी ज़मीनों के अधिग्रहण की कोशिश करनी चाही थी। इस बार भी किसानों को वही अंदेशा है कि उनकी पैदावार की खरीद का लंबे अरसे से चला आ रहा बंदोबस्त बदलने का आखिरी नतीजा उनसे उनकी ज़मीन छिनने में निकलेगा।

किसानों की नाराज़गी के पीछे समझ यह है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अनाज की सरकारी खरीद बंद हो जाने से उन्हें बाज़ार और बड़ी पूंजी के रहमो-करम पर रह जाना पड़ेगा। खेती से होने वाली आमदनी उत्तरोत्तर अनिश्चित होती चली जाएगी। अंत में होगा यह कि वे कांट्रेक्ट फार्मिंग और कॉर्पोरेट फार्मिंग के चंगुल में फंस जाएंगे। यह नई स्थिति किसानों के तौर पर उनकी पहचान को हमेशा के लिए संकटग्रस्त कर देगी और कुल मिलाकर खेती पर आधारित अर्थव्यवस्था का चेहरा पूरी तरह से बदल जाएगा।

सवाल यह है कि कृषि मंत्री और प्रधानमंत्री के आश्वासनों के बावजूद पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तप्रदेश, कर्नाटक, मप्र और छत्तीसगढ़ के किसान अपनी यह राय बदलने के लिए तैयार क्यों नहीं हैं? इस सवाल के जवाब में खेती के मामलों के जानकार 1998 में जारी की गई विश्व बैंक की डेवलपमेंट रपट का हवाला देते हैं। इस रपट में इस संस्था ने भारत सरकार को डांट लगाई थी कि उसे 2005 तक चालीस करोड़ ग्रामीणों को शहरों में लाने की जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसे पूरा करने में वह बहुत देर लगा रही है।

विश्व बैंक की मान्यता स्पष्ट थी कि भारत में देहाती ज़मीन ‘अकुशल’ हाथों में है। उसे वहां से निकालकर शहरों में बैठे ‘कुशल’ हाथों में लाने की जरूरत है। जब ऐसा हो जाएगा तो न केवल जमीन जैसी बेशकीमती चीज़ औद्योगिक पूंजी के हत्थे चढ़ जाएगी, बल्कि उस ज़मीन से बंधी ग्रामीण आबादी शहरों में सस्ता श्रम मुहैया कराने के लिए आ जाएगी। मोदी सरकार विश्व बैंक द्वारा दिए गए इस दायित्व को अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपा सरकार और मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार के मुकाबले अधिक उत्साह से पूरा करने में जुटी हुई है।

दोनों पिछली सरकारें शायद राजनीतिक नुकसान के डर से विश्व बैंक की लताड़ खाती रहीं, पर काम पूरा नहीं कर पाईं। नरेंद्र मोदी को राजनीतिक नुकसान का कोई खास डर नहीं है। पुराने सहयोगी अकाली दल के सरकार छोड़ देने से भी वे विचलित नहीं हैं। भाजपा पहले से ही अकालियों के ढींढसा गुट के साथ जुड़ने के बारे में सोच रही थी। नागरिकता कानून के सवाल पर भी अकालियों का समर्थन सरकार को नहीं मिला था। वैसे भी अकाली पंजाब में एक के बाद एक तीन चुनावों में मोदी की लहर का फायदा उठाने में नाकाम रहकर अपनी उपयोगिता खोते जा रहे थे। जाहिर है कि अब भाजपा पंजाब में नए सिरे से राजनीतिक पेशबंदी करेगी।

दूसरे, मोदी और उनके रणनीतिकारों को लगता है कि यह किसान आंदोलन न बहुत दूर तक जाएगा और ना ही दूर तक फैलेगा। कारण यह कि मौजूदा अंदेशे मुख्य तौर पर मंझोले और बड़े किसानों तक सीमित हैं और देश के 80% से ज्यादा किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं। मोदी सरकार का मानना है कि इन किसानों को संतुष्ट रखने के लिए उसके पास सीधे इन खातों में रुपया पहुंचाने से लेकर मुफ्त अनाज बांटने जैसी युक्तियां हैं।

मोटे तौर पर भाजपा की यह रणनीति ठीक लगती है। लेकिन, अगर मंझोले और बड़े किसानों का आंदोलन उग्र हो गया तो उससे बनने वाली विषम राजनीतिक परिस्थिति को एक संगीन सांसत में डाल सकती है। क्या इस रणनीति ने ऐसी परिस्थिति का काट भी सोच लिया है। (ये लेखक के अपने विचार हैं।)



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Why is Modi government disinterested with the peasant movement?


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यही ट्रेंड रहा तो सक्रिय मरीज 102 दिन में आधे होंगे, वजह- जितने नए मरीज मिले, उससे ज्यादा संख्या ठीक होने वालों की रही

कोरोना काल में अब तक हम पढ़ते-सुनते आए हैं कि मरीज कितने दिन में दोगुने हो रहे हैं। लेकिन, अब पांच महीने बाद लगातार 9 दिन सक्रिय मरीज बढ़ने की दर शून्य से नीचे है, इसलिए गणना भी बदल गई है। 20 से 28 सितंबर तक सक्रिय मरीज बढ़ने की औसत दर -0.21% रही। यही ट्रेंड रहता है तो अगले 102 दिन में सक्रिय मरीजों की संख्या घटकर आधी रह जाएगी।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, सक्रिय मरीज बढ़ने की दर लगातार 14 दिन शून्य से नीचे रहती है तो उसे कोरोना का पीक मान लिया जाता है। इसी आधार पर अमेरिका, ब्राजील और यूरोपीय देश अपने यहां पीक घोषित कर चुके हैं।

सरकारी आंकड़ेे कितने सच?

मध्यप्रदेश में एंटीजन टेस्ट में मिले बिना लक्षण वाले मरीजों को रिपोर्ट नहीं करने का आदेश जारी हुआ है। इसी तरह गुजरात, बंगाल, तेलंगाना में आंकड़ों पर सवाल उठ चुके हैं।

  • देश में 20 से 28 सितंबर के बीच कुल 56,298 सक्रिय मरीज घटे हैं। इसमें 35,818 अकेले महाराष्ट्र के है।
  • 21 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय मरीज घटने का ट्रेंड पिछले दो हफ्ते से बनना शुरू हुआ है। चुनावी राज्य बिहार में वृद्धि दर -1.2% रही है।
  • पूर्वोत्तर में सिक्किम (+48.5%), अरुणाचल प्रदेश (+33.4%) और मणिपुर (+26.2%) में भी सक्रिय मरीज अचानक बढ़ने शुरू हुए हैं।

बड़ी उम्मीद... सबसे संक्रमित तीनों देशों में अब बढ़ोतरी नहीं हो रही

अमेरिका में सक्रिय मरीज 25 लाख पर थम गए हैं। जबकि, ब्राजील में आंकड़ा घटकर 5 लाख के पास पहुंच चुका है।



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If this trend is there, then the active patients will be half in 102 days, because - the number of new patients received, the number of people recovering.


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ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड से खरीदे घटिया गोला-बारूद से पिछले छह वर्ष में 403 हादसे; 24 जवानों की मौत, 131 घायल हुए

हर साल औसतन भारतीय सेना के 111 जवान सीमा पर दुश्मन की गोलियों से शहीद हो जाते हैं...मगर पिछले 6 साल में 24 जवान अपनी ही सेना के खराब गोला-बारूद के कारण जान गंवा बैठे। जबकि 131 जवान घायल हुए, इनमें कई हाथ-पैर तक खो चुके हैं। यह खुलासा ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) से खरीदे गए गोला-बारूद व अन्य सामान पर सेना के एक आंतरिक आकलन में हुआ है।

ओएफबी, दुनिया के सबसे पुराने सरकारी रक्षा उत्पादन बोर्डों में से एक है। रक्षा मंत्रालय को सौंपी गई इस आंतरिक रिपोर्ट में बताया गया है कि ओएफबी से खरीदे गए गोला-बारूद की गुणवत्ता खराब थी, इसकी वजह से न सिर्फ हादसे हुए बल्कि 5 साल में 960 करोड़ रुपए का आयुध अपनी तय शेल्फ लाइफ से पहले ही खराब हो गया।

सेना का आंतरिक आंकलन...ओएफबी के रसायनों की क्वालिटी व मिक्सिंग सही न होने से तय समय से पहले ही खराब हो गया 960 करोड़ का गोला-बारूद

सेना के अधिकारियों ने बताया कि हर प्रोडक्ट की तरह गोला-बारूद की शेल्फ लाइफ यानी आयु तय होती है। शेल्फ लाइफ पूरी होने के बाद इसे डिस्पोज ऑफ कर दिया जाता हैै। आयुध की आयु इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें इस्तेमाल रसायन की क्वालिटी कैसी है और इसकी मिक्सिंग कैसे हुई है।

ओएफबी में रसायनों की मिक्सिंग ऑटोमेटेड नहीं है। इसीलिए यह शेल्फ लाइफ भी पूरी नहीं कर पाते हैं। इसी वजह से हादसे भी होते हैं। रिपोर्ट में जिन आयुध पर सवाल उठाया गया है उनमें 25 मिमी. एयर डिफेंस शेल्स, आर्टिलरी शेल्स और 125 मिमी. टैंक शेल्स के साथ ही इंफेंट्री की असॉल्ट राइफल्स में इस्तेमाल होने वाली बुलेट्स भी हैं।

150 की कैप 500 में देता है ओएफबी, सेना बाजार दर पर वर्दी खरीदती तो छह साल में 480 करोड़ बच जाते

ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड से मिलने वाली जवानों की वर्दी में सेना बड़ा घाटा उठा रही है। आंतरिक मूल्यांकन के अनुसार जो कॉम्बैट ड्रेस मार्केट में 1800 रुपये से कम में मिल सकती है वह 3300 रु में खरीदी जाती है। कैप 500 रुपये में खरीदी जाती है जो 150 रुपये से कम मिल रही है।

ओएफबी से खरीदी एक जवान की पूरी वर्दी की कुल लागत 17950 रुपये है। इसकी बाजार में कीमत 9400 रुपये है। यानी ओएफबी हर जवान की वर्दी पर 8550 रुपए ज्यादा ले रहा है। 12 लाख जवानों के लिए साल में महज चार वर्दियों का हिसाब से भी जोड़ा जाए तो 480 करोड़ रुपये का अंतर आता है।



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403 accidents in the last six years from poor ammunition purchased from Ordnance Factory Board; 24 soldiers killed, 131 injured


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खुली मिठाई पर देखें तारीख, बीमा में जुड़ेंगे अधिक रोग; जानिए आपकाे कितना और कैसे फायदा हाेगा

एक अक्टूबर से ये नौ बदलाव होने वाले हैं। जानिए किस परिवर्तन से आपकाे कितना और कैसे फायदा हाेगा...

लाइसेंस-आरसी रखने का झंझट नहीं : वाहन चलाते समय अब लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इनकी साॅफ्ट काॅपी भी मान्य हाेगी। माेटर वाहन अधिनियम 1989 में संशाेधन के तहत गाड़ी से जुड़े दस्तावेजाें का रखरखाव आईटी पाेर्टल के जरिए होगा।

गाड़ी चलाते हुए मोबाइल इस्तेमाल कर सकेंगे: गाड़ी चलाते समय हाथ में मोबाइल फोन का इस्तेमाल रूट नेविगेशन के लिए कर सकेंगे। हालांकि ड्राइवर का ध्यान भंग नहीं होना चाहिए। हालांकि, मोबाइल से बात करने पर 5 हजार रुपए तक जुर्माना लग सकता है।

खुली मिठाई के लिए मियाद लिखनी हाेगी: बाजार में बिकने वाली खुली मिठाई के लिए विक्रेता काे लिखना होगा कि किस तारीख तक मिठाई इस्तेमाल की जा सकेगी। खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने यह अनिवार्य कर दिया है।

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में बदलाव: बीमा नियामक इरडा के नए नियमों के अनुसार पॉलिसीधारक ने सतत 8 साल प्रीमियम चुकाई है तो कंपनियां क्लेम रिजेक्ट नहीं कर पाएंगी। अधिक बीमारियां भी कवर हाेंगी। हालांकि इससे प्रीमियम बढ़ सकती है। ग्राहक कंपनी बदलते हैं तो पुराना वेटिंग पीरियड जुड़ेगा।

पैसा विदेश भेजने पर 5% टैक्स: विदेश में बच्चाें या रिश्तेदाराें काे पैसे भेजते हैं या प्राॅपर्टी खरीदते हैं ताे रकम पर 5% टीसीएस देना होगा। फाइनेंस एक्ट 2020 के मुताबिक, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत 2.5 लाख डॉलर सालाना तक विदेश भेज सकते हैं। इसे टीसीएस के दायरे में लाया गया है।

सरसाें तेल में मिलावट नहीं: अब सरसाें का शुद्ध तेल मिलेगा। एफएसएसएआई ने इसमेें अन्य तेल मिलाने पर राेक लगा दी है। अब तक चावल की भूसी यानी राइस ब्रान, तेल या सस्ते तेल मिलाए जाते थे।

रंगीन टीवी खरीदना महंगा: केंद्र सरकार ने रंगीन टीवी की असेंबलिंग में इस्तेमाल हाेने वाले ओपन सेल कंपाेनेंट के आयात पर 5% सीमा शुल्क बहाल कर दिया है। इस पर सरकार ने एक साल की छूट दी थी।

गूगल मीट पर फ्री मीटिंग 60 मिनट ही: ऑनलाइन मीटिंग के लिए चर्चित माध्यम गूगल मीट का इस्तेमाल सीमित होगा। फ्री यूजर अधिकतम 60 मिनट मीटिंग कर पाएंगे। पेड यूजर्स इससे लंबी मीटिंग कर पाएंगे।

उज्ज्वला गैस कनेक्शन फ्री नहीं: मुफ्त रसाेई गैस कनेक्शन लेने की प्रक्रिया 30 सितंबर काे खत्म हाे रही है। काेराेना के चलते इसकी मियाद बढ़ाई गई थी।



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See date on open sweets, more diseases will be added to insurance; Know how much and how you will benefit


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Presidential debate gets personal as Biden calls Trump a ‘clown,’ Trump tells Biden he’s not ‘smart’

09/29/20 6:38 PM

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President Trump, Joe Biden clash over Supreme Court nomination. Join the debate now.

09/29/20 6:26 PM

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Presidential debate: Trump, Biden clash over Barrett Supreme Court nomination, ObamaCare in first showdown

09/29/20 6:16 PM

बाबरी मामले में सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला आज; लॉकडाउन में अंबानी ने हर घंटे कमाए 90 करोड़; दीपिका-श्रद्धा के खातों की जांच होगी

देश में कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या 51 लाख के पार हो गई है जो कि दुनिया में सबसे ज्यादा है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी बोले हैं कि अब कुछ लोग किसान बिलों का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी काली कमाई का एक और जरिया खत्म हो गया है। बहरहाल, शुरू करते हैं मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ...

आज इन 4 इवेंट्स पर रहेगी नजर

1. IPL में आज राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स आमने-सामने होंगे। शाम सात बजे टॉस होगा। मैच साढ़े सात बजे शुरू होगा।

2. बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में फैसला आएगा। इस केस में आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती आरोपी हैं।

3. राशन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने की आज आखिरी तारीख है।

4. 2018-19 का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की भी आज आखिरी तारीख है।

अब कल की 6 महत्वपूर्ण खबरें

1. 6 महीनों से हर घंटे 90 करोड़ रुपए कमा रहे हैं मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी पिछले 6 महीने से हर घंटे 90 करोड़ रुपए कमा रहे हैं। यह जानकारी हुरुन इंडिया और आईआईएफएल वेल्थ मैनेजमेंट लिमिटेड ने अपनी रिपोर्ट में दी है। 31 अगस्त 2020 तक 1,000 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा संपत्ति वाले 828 भारतीयों को इस लिस्ट में शामिल किया गया है। मुकेश अंबानी की कुल इनकम 6,58,400 करोड़ रुपए है।

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2. दलित लड़की से गैंगरेप, रीढ़ की हड्डी तोड़ी, जीभ काट दी

उतर प्रदेश के हाथरस जिले में जिस दलित लड़की का गैंगरेप हुआ था, उसने मंगलवार तड़के 3 बजे दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में अंतिम सांस ली। 14 सितंबर को दरिंदों ने गैंगरेप के बाद उसकी जीभ काट दी थी और रीढ़ की हड्डी तोड़ दी थी। पिता ने बताया कि ये लोग गांव के ठाकुर हैं। मेरे पिता से भी मारपीट कर चुके हैं। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट...

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3. मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर 3 नवंबर को वोटिंग

चुनाव आयोग ने मंगलवार को 56 विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किया। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और उत्तर प्रदेश समेत 10 राज्यों की 54 विधानसभा सीटों पर 3 नवंबर को मतदान होगा। वहीं, बिहार की एक लोकसभा सीट और मणिपुर की दो विधानसभा सीटों पर 7 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। सभी सीटों के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे। 16 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल होंगे।

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4. एम्स ने सीबीआई को सौंपी सुशांत की विसरा रिपोर्ट

एम्स की टीम ने सुशांत सिंह राजपूत की विसरा रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीम को विसरा में किसी तरह का जहर नहीं मिला है। सुशांत की ऑटोप्सी रिपोर्ट की जांच के लिए 21 अगस्त को डॉ. सुधीर गुप्ता की लीडरशिप में एम्स के पांच डॉक्टर्स की टीम बनाई गई थी।

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5. बाबरी मस्जिद विध्वंस केस पर केंद्रित भास्कर एक्सप्लेनर

अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को गिराए जाने के करीब 28 साल पूरे हो गए हैं। ढांचे को गिराने के क्रिमिनल केस की सुनवाई लखनऊ में स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चल रही थी। विवादित ढांचे को गिराए जाने के मामले में 32 आरोपी हैं। इनमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार और साक्षी महाराज आरोपी हैं।

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6. ड्रग्स मामले में दीपिका, सारा, श्रद्धा और रकुलप्रीत के बैंक खातों की जांच होगी

​​​​​​​सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले की जांच में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो अब दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, श्रद्धा कपूर और रकुलप्रीत सिंह के बैंक खातों से हुए लेन-देन की जांच करेगा। इन एक्ट्रेस से NCB के अधिकारी ड्रग्स से जुड़ी वॉट्सऐप चैट के बारे में कई घंटे की पूछताछ कर चुके हैं।

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अब 30 सितंबर का इतिहास

1898ः अमेरिका में न्यूयॉर्क शहर की स्थापना हुई।

1993ः भारत के महाराष्ट्र में भूकंप के कारण 10,000 हजार से ज्यादा लोग मारे गए, जबकि लाखों बेघर हो गए।

2010: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन को रामलला, निर्मोही अखाड़े और वक्फ बोर्ड में बराबर हिस्से में बांटने का फैसला सुनाया।

अब जाते-जाते जिक्र पांच बार के वर्ल्ड चेस चैम्पियन विश्वनाथन आनंद का। 2003 में आज ही के दिन भारतीय शतरंज के बादशाह विश्वनाथन ने विश्व रैपिड शतरंज चैम्पियनशिप जीती थी। पढ़िए उन्हीं के शब्दों में जीत का मूल मंत्र...

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Big decision of CBI court in Babri case today; Ambani earned 90 crores every hour in lockdown; Deepika-Shraddha's accounts will be investigated


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19 साल पहले माधवराव सिंधिया का प्लेन क्रैश हुआ था, 1984 में ग्वालियर सीट पर अटल जी को हराया था

हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में गए वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया का प्राइवेट प्लेन 30 सितंबर 2001 को क्रैश हो गया था। वे कुछ पत्रकारों के साथ यूपी के मैनपुरी में एक सभा को संबोधित करने जा रहे थे, तब उनके सेसना सी-90 एयरक्राफ्ट ने आग पकड़ ली थी।

खास बात यह थी कि उस समय देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनका पार्थिव शरीर लाने के लिए विशेष विमान दिल्ली भेजा था। यह महत्वपूर्ण है कि सिंधिया ने ही 1984 में वाजपेयी को ग्वालियर में लोकसभा चुनाव में शिकस्त दी थी।

ग्वालियर के सिंधिया राजवंश में माधवराव का जन्म 10 मार्च 1945 को हुआ था। शुरुआती पढ़ाई सिंधिया स्कूल से और फिर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में उन्होंने हायर स्टडीज की। सिंधिया उस समय कांग्रेस में शामिल हुए थे, जब इंदिरा गांधी ने सत्ता गंवा दी थी। उन्हें सबसे सफल रेल मंत्रियों में से एक माना जाता है। उनके कार्यकाल में ही शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनें चलाई गई थी।

नरसिम्हा राव की कैबिनेट में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद भी हवाला कांड की वजह से 1996 में उन्हें टिकट नहीं दिया गया तो उन्होंने मध्यप्रदेश विकास कांग्रेस बना ली थी। हालांकि, सीताराम केसरी के कांग्रेस अध्यक्ष बनते ही वे पार्टी में लौट आए थे।

1999 में जब सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठा तो सिंधिया को कांग्रेस में प्रधानमंत्री पद का तगड़ा दावेदार समझा जाता था। सिंधिया लोकसभा में डिप्टी फ्लोर लीडर थे और उन्हें कांग्रेस प्रेसिडेंट और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी का विश्वासपात्र समझा जाता था। 1971 से 1999 तक वे सांसद रहे।

फर्राटेदार हिंदी और अंग्रेजी बोलने वाले ग्वालियर के पूर्व श्रीमंत सिंधिया की जमीनी पकड़ बेहद मजबूत थी। एक और खास बात यह है कि वे हमेशा खेलों से जुड़े रहे। मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के लंबे समय तक अध्यक्ष भी रहे।

2010: राम जन्मभूमि केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 30 सितंबर 2010 को विवादित बाबरी मस्जिद मामले में जमीन के मालिकाना हक को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने 2:1 के बहुमत से विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटकर रामलला, निर्मोही अखाड़े और वक्फ बोर्ड को एक-एक हिस्सा देने का फैसला सुनाया।

हालांकि, बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। पिछले साल नवंबर में फैसला आया कि विवादित जमीन पर राम जन्मभूमि बनना चाहिए और अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसके लिए भूमिपूजन किया है।

आज की तारीख को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है...

  • 1687ः औरंगजेब ने हैदराबाद के गोलकुंडा के किले पर कब्जा किया।
  • 1841ः अमेरिका के मशहूर वैज्ञानिक सैमुएल स्लॉकम ने 'स्टेप्लर' का पेटेंट कराया।
  • 1846: डॉ. विलियम मॉर्टन ने एनेस्थेशिया का इस्तेमाल कर पहली बार दांत निकाला।
  • 1947ः पाकिस्तान और यमन संयुक्त राष्ट्र संघ में शामिल हुए।
  • 1967ः अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मौद्रिक प्रणाली में सुधार किया।
  • 1975: AH-64 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर ने पहली बार उड़ान भरी।
  • 1984ः उत्तरी एवं दक्षिणी कोरिया के बीच 1945 के बाद पहली बार सीमाएं खोली गईं।
  • 1993ः महाराष्ट्र के लातुर में भूकंप के कारण 10,000 से अधिक लोग मारे गए। लाखों बेघर हुए।
  • 1996: तमिलनाडु की राजधानी का नाम मद्रास से बदलकर चेन्नई रखा गया।
  • 2001ः इजरायल की आतंरिक मंत्रिपरिषद ने फिलीस्तीन के साथ हुए समझौते को मंजूरी दी।
  • 2008: जोधपुर में मेहरानगढ़ फोर्ट के देवी मंदिर में भगदड़ से 200 से ज्यादा मौतें हुई थी।
  • 2013: कोर्ट ने चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव को भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया।


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